टाटा कैपिटल की ‘ग्रीन स्विच’ पहल से 99 गांवों में पहुंची स्वच्छ ऊर्जा

झारखंड
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  • झारखंड, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के 4,800 से ज़्यादा घरों को बिजली

रांची। टाटा कैपिटल के ‘ग्रीन स्विच’ पहल से उन ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंच रही है जहां अब तक ठीक तरीके से बिजली नहीं पहुंच पाती थी। यह कार्यक्रम सोलर माइक्रो-ग्रिड के ज़रिये महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के गांवों को 24/7 स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे ज़िंदगी बेहतर होती है। आय के अवसर पैदा होते हैं। पिछले साल, ‘ग्रीन स्विच’ ने 19 नए गांव जोड़े, जिससे 428.86 केडब्ल्यूपी सोलर क्षमता के साथ 7,479 लोगों को लाभ हुआ।

कई इलाकों का विद्युतीकरण हो चुका है, लेकिन दूर-दराज़ के बहुत से गांवों में अभी भी केंद्रीय ग्रिड से बिजली नहीं पहुंच रही है। ‘ग्रीन स्विच’ के विकेंद्रीकृत सोलर मिनी-ग्रिड, इन जगहों के लिए बेहतरीन समाधान हैं, जो उन जगहों पर सस्ती और विश्वसनीय तरीके से बिजली प्रदान करते हैं जहां केंद्रीय ग्रिड की पहुंच संभव नहीं हो पाती।

इन मिनी-ग्रिड की वजह से केरोसिन तथा डीज़ल की ज़रूरत नहीं होती, बच्चों को ज़्यादा समय तक पढ़ाई करने की सुविधा मिलती है, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होता है एवं स्थानीय व्यवसायों में सहयोग मिलता है।

इस कार्यक्रम के तहत सोलर मिनी-ग्रिड स्थापित किया जाता है, स्थानीय परिचालकों को प्रशिक्षित किया जाता है और बिजली से पंपों व छोटे व्यवसायों को जोड़कर रोज़गार में बढ़ोतरी की जाती है। इस तरह, लोगों को बिजली के साथ-साथ उत्पादकता और आय बढ़ाने के साधन भी मिलते हैं।

‘ग्रीन स्विच’ ने अब तक 99 गांवों को बिजली प्रदान की है, 20,700 से ज़्यादा लोगों तक पहुंच बनाई है और 4,800 से ज़्यादा घरों को बिजली की आपूर्ति की है। इस पहल के तहत 155 से ज़्यादा स्थानीय युवाओं को ग्रिड परिचालक के रूप में प्रशिक्षित किया गया और 290 से ज़्यादा सोलर पंप स्थापित किए गए, जिससे स्थानीय उद्यमियों की आय में अनुमानित तौर पर ₹40,000 प्रति वर्ष की वृद्धि हुई है।

इस कार्यक्रम के तहत साल भर पहले 79 गांवों को शामिल किया गया था, जहां 772.74 केडब्ल्यूपी सोलर क्षमता के साथ 4,172 घरों को बिजली की आपूर्ति की गई। इससे ज़ाहिर होता है कि यह पहल कितनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है।

‘ग्रीन स्विच’ सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा के लिए संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 7 का समर्थन करता है और भारत के “सभी के लिए बिजली” दृष्टिकोण के अनुरूप है। यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि कैसे एक सीएसआर कार्यक्रम ऊर्जा की पहुंच को वहनीय और स्थानीय समुदाय आधारित बना सकता है।

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