पशु रोगविज्ञानियों का वार्षिक सम्मेलन कल से रांची वेटेरिनरी कॉलेज में

झारखंड
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रांची। इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ वेटनरी पैथोलॉजिस्ट्स का 42वां वार्षिक सम्मेलन का आयोजन 4 से 6 दिसंबर, 2025 तक बिरसा कृषि विश्वविद्यालय का रांची वेटेरिनरी कॉलेज (आरवीसी) कर रहा है। इसमें देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के 300 से अधिक पशु रोगविज्ञानी शामिल होंगे।

यहां वे आणविक पैथोलॉजी और ऑन्कोलॉजी, फार्म एवं पालतू पशुओं की पैथोलॉजी, टॉक्सिकोपैथोलॉजी, इम्यूनोपैथोलॉजी एवं फॉरेंसिक पैथोलॉजी, एवियन पैथोलॉजी, लैब एनिमल, जलीय एवं वन्यजीव पैथोलॉजी के क्षेत्र में अत्याधुनिक उपकरणों, तकनीकों और हालिया प्रगति पर चर्चा करेंगे।

इस अवसर पर ‘परंपरागत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल पैथोलॉजी के बीच सेतु निर्माण-पशु रोग निदान के लिए एक भविष्यमुखी दृष्टिकोण’ विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान इंडियन कॉलेज ऑफ वेटेरिनरी पैथोलॉजिस्ट्स की वार्षिक बैठक भी होगी। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास और ओक्लाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी, यूएसए के तीन प्रोफेसर विभिन्न सत्रों में थीमैटिक व्याख्यान एवं मुख्य भाषण देंगे।

कार्यक्रम के आयोजन सचिव और बीएयू के पशुचिकित्सा संकाय के डीन डॉ एमके गुप्त ने बताया कि कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की 4 दिसंबर को उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि होंगी।

विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीख पी और बीएयू के कुलपति डॉ एससी दुबे विशिष्ट अतिथि होंगे। एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, जम्मू के कुलपति डॉ बीएन त्रिपाठी सत्र की अध्यक्षता करेंगे।

डॉ गुप्त ने कहा कि पैथोलॉजी पशु चिकित्सा क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह सही निदान, उपचार योजना, रोग की निगरानी और रोकथाम का आधार बनती है।

आज के रोगविज्ञानी से अपेक्षा की जाती है कि वे आणविक जीवविज्ञान, आनुवंशिकी, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और अत्याधुनिक इमेजिंग जैसी विधाओं में दक्ष हों, ताकि पशु चिकित्सा प्रैक्टिस की बढ़ती निदान संबंधी मांगों को पूरा किया जा सके।

हाल के वर्षों में जैव-प्रौद्योगिकी, नैनो-प्रौद्योगिकी और डिजिटल इमेजिंग में हुए नवाचारों ने पीसीआर, जीन अनुक्रमण, नैनो-सेंसर और एआई-संचालित इमेज विश्लेषण जैसे उपकरणों को जन्म दिया है, जो रोगों का अत्यधिक संवेदनशील और विशिष्ट रूप से-यहां तक कि आणविक स्तर पर भी पता लगाने में सक्षम बनाते हैं।

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