इन वजहों से बढ़ रहा है हृदय रोग होने का खतरा

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  • जागरुकता के लिए होंगे 29 सितंबर को होंगे विविध आयोजन

हेमंत वर्मा

राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)। हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्‍य हृदय स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करना है। इस वर्ष कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ फॉर एवरीवन थीम यह कार्यक्रम आधारित है। उस दिन विभिन्न प्रेरक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस संबंध में उप संचालक (एनपीसीडीसीएस) संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं ने दिशा-निर्देश दिए हैं।

भारत में ये है मृत्‍यु दर

पत्र में यह भी कहा गया है कि भारत में हृदय संबंधित रोगों से लगभग 28.1 प्रतिशत लोगों की मृत्यु प्रतिवर्ष हो रही है, जो गंभीर विषय है। ऐसे में हृदय रोगों की रोकथाम के लिए जागरुकता कार्यक्रम काफी अहम और कारगर है। विश्व हृदय दिवस कार्यक्रम के लिए राज्य एनसीडी सेल द्वारा समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कोविड-19 के समस्त दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए 30 सितंबर तक जिला एवं ब्लॉक स्तर पर हृदय स्वास्थ्य संबंधी जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

लाल रिबन लगाकर मनाना है

जागरुकता कार्यक्रम के अंतर्गत अस्पताल, स्कूल-कालेज आदि में हृदय रोग के प्रति जागरुकता से संबंधित होर्डिग एवं बैनर्स लगाने के लिए कहा गया है। इसी तरह सार्वजनिक जागरूकता हेतु रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप व सिनेमा घर जैसे स्थानों पर ब्रोसर एवं पैम्पलेट वितरण किया जाएगा। गीत और नाटक स्पर्धा जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाएंगे। स्वस्थ भोजन की उपलब्धता पर भी लोगों जागरूक किया जाएगा। वहीं स्ट्रोक दिवस को सभी लोगों को लाल रिबन लगाकर मनाने के लिए कहा गया है।

ये है रोग की मुख्‍य वजह

राजनांदगांव के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मिथिलेश चौधरी के मुताबिक तम्बाकू सेवन, अस्वस्थ आहार, शारीरिक निष्क्रियता और शराब के सेवन से हृदय रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। इन मुख्य कारकों पर नियंत्रण करके 80 प्रतिशत हृदय रोग संबंधी मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। इस दिशा में जन-जागरुकता के लिए जिले में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं जिले में 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाएगा।

जागरुकता के लिए ऐसे होंगे प्रयास

० शिविर में एनजीओ या निजी सेक्टर के हृदय रोग विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जा सकता है।

० हृदय संबंधी रोग के लिए शिविर में निःशुल्क डायग्नोस्टिक सुविधा अनिवार्य होगी। इसमें उच्च रक्तचाप, रक्त शर्करा, बीएमआई, सिरम कोलेस्ट्राल, एचडीएल, व्हीएलडीएल व पोर्टेबल ईसीजी की सुविधा दी जाएगी।

० प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ द्वारा सार्वजनिक व्याख्यान, सार्वजनिक वार्ता परामर्श।

० सूचना संचार गतिविधि रेडियो जिंगल, टीवी-दूरदर्शन में विडियो क्लिपिंग प्रदर्शन-रेडियो स्पॉट प्रदर्शन।

० हृदय रोग संबंधी सेमिनार का आयोजन।

० स्कूल में हृदय संबंधी प्रतिस्पर्धा आयोजन एवं जंक फूड से होने वाले दुष्प्रभाव पर जागरुकता लाना।

० हृदय रोगियों के लिए विशेष योग शिविर का आयोजन।