- बाल विवाह की रोकथाम के लिए चलाया जायेगा जागरुकता कार्यक्रम
दुमका। अक्षय तृतीया के मौके पर दुमका जिले में बाल विवाह नहीं होने दिया जायेगा। इसके लिए विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं की मदद से 3 मई को अक्षय तृतीया से पहले सभी दस प्रखंडों और जिला मुख्यालय में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। यह निर्णय जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू), बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) और जाबला रिसर्च ऑगर्नाइजेशन के संयुक्त तत्वाधान में हिजला स्थित जिला बाल संरक्षण इकाई के सभागार में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में लिया गया।
डीसीपीओ प्रकाश चंद्र ने बताया कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने अक्षय तृतीया के मौके पर परंपरागत रूप से देशभर में बाल विवाह होने के प्रचलन को संज्ञान में लेते हुए इस बारे में सभी जिलों में जागरुकता अभियान चलाकर बाल विवाह की रोकथाम का निर्देश दिया है। इसी निर्देश के आलोक में इस बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें प्रखंडों एवं जिला मुख्यालय के हाट, बाजार, रेलवे स्टेशन और भीड़-भाड़ वाले इलाके में सिग्नेचर कैंपेन, पंपलेट वितरण जैसे कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे।
बैठक में बाल विवाह के कारणों और उसकी रोकथाम को लेकर विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभवों को साझा किया। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अमरेन्द्र कुमार ने कहा कि बाल विवाह सामाजिक अभिशाप है। अशिक्षा और गरीबी इसका मुख्य कारण है। बाल विवाह के मामले में दो साल तक की सजा और एक लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है। जागरुकता कार्यक्रम चलाकर बाल विवाह की रोकथाम की जा सकती है। उन्होंने सभी स्टेक होल्डर से अपील की कि जिन प्रखंडों में वह काम कर रहे हैं। वहां 1 से 3 मई तक बाल विवाह को लेकर जागरुकता कार्यक्रम आयोजित करें। गणमान्य लोगों की सहभागिता भी सुनिश्चित करें।
सीडब्ल्यूसी सदस्य डा राज कुमार उपाध्याय ने बताया कि वर्ष 2022 में अबतक समिति के समक्ष बाल विवाह के चार मामले दर्ज किये गये हैं। चाइल्डलाइन के हेल्पलाइन नंबर 1098 पर बाल विवाह की लगातार सूचनाएं मिलती रहती हैं, जिसपर बीडीओ सह बाल विवाह निषेध पदाधिकारी और पुलिस के सहयोग से कार्रवाई की जा रही है।
कार्यक्रम में सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी विजय लक्ष्मी, महिला सदस्य नूतन बाला, जाबाला एक्शन रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन की डॉ दुर्वा बंदोपाध्याय व मुमून कुंडू, चाइल्डलाइन दुमका के केन्द्र समन्वयक मधुसूदन सिंह व टीम मेंबर निशा कुमारी, लोक कल्याण सेवा केंद्र के सचिव संजीव कुमार, मानवी के सचिव नलिनीकांत, वर्ल्ड विजन के ई कुजुर व जोसेफ, लाहंती की नैन्सी अवनीता हेम्ब्रम, सिनी के चैतन्य चांद, चेतना विकास /चाइल्ड फंड के उपेन्द्र कुमार, प्रयास फाउंडेशन के मधुर सिंह, जनमत शोध संस्थान के कुंदन कुमार साह, एलपीओ अनिल मोहन ठाकुर, दिव्यांशु ने भी बाल विवाह की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिये।