उषा मार्टिन ने मड़ुआ की खेती से बाजार तक महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

झारखंड सरोकार
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  • 30 एकड़ बंजर भूमि में खेती व 25 ग्रामीण को उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण
  • ग्रामीण महिलाओं को सक्षम उद्यमी बनाने की है पहल : डॉ मयंक मुरारी

रांची। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से उषा मार्टिन फाउंडेशन ने श्रीअन्न (मोटे अनाज) मड़ुआ की खेती और उससे बनने वाले खाद्य उत्पादों को बाजार से जोड़ने की पहल की है। इसके तहत इस वर्ष 30 एकड़ बंजर भूमि पर मड़ुआ की खेती की गई है।

फाउंडेशन का लक्ष्य महिलाओं को खेती से लेकर उत्पाद निर्माण, विपणन और बाजार तक पहुंच बनाने में सहयोग देना है, ताकि उनके लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के स्थायी अवसर विकसित हो सकें।

इस पहल के तहत 25  ग्रामीण महिलाओं को मड़ुआ से विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री और उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया है। महिलाओं को संगठित कर दो समूह बनाए गए हैं, जिससे वे सामूहिक रूप से उत्पादन और विपणन की गतिविधियां संचालित कर सकें।

इन समूहों को सोशल मीडिया से भी जोड़ा गया है, ताकि उत्पादों का प्रचार-प्रसार हो और संभावित ग्राहकों एवं बाजारों तक पहुंच बनाई जा सके।

उषा मार्टिन फाउंडेशन के प्रमुख डॉ. मयंक मुरारी ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को केवल प्रशिक्षण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके उत्पादों की बिक्री और नियमित आय के अवसर सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्यता ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। मड़ुआ जैसे पौष्टिक श्रीअन्न की खेती और उससे विभिन्न खाद्य उत्पाद तैयार करने से रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

फाउंडेशन खेती से लेकर उत्पाद तैयार करने और बाजार में बिक्री तक महिलाओं को सहयोग दे रहा रहा है। अब  ये समूह बनाकर और प्रदर्शनी लगाकर अपने उत्पाद यानी लड्डू, निमकी ठेकुआ आदि उत्पाद बेच रही है।

समूह आधारित पहल से महिलाएं एक-दूसरे के अनुभवों का लाभ उठा रही है और अपनी आर्थिक गतिविधियों को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रही है। इन्हें डिजिटल मार्केटिंग से भी ‌जोड़ा जा रहा है।

यह पहल स्थानीय कृषि संसाधनों के उपयोग, श्रीअन्न को बढ़ावा देने और ग्रामीण महिलाओं की उद्यमशीलता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे बंजर भूमि के उपयोग के साथ महिलाओं के लिए आजीविका के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

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