
रांची। झारखंड के प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में समग्र शिक्षा अभियान के तहत मिलने वाला विद्यालय विकास अनुदान (स्कूल ग्रांट) पिछले दो वित्तीय वर्षों से नहीं मिला है। इसके कारण स्कूलों की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने अनुदान राशि जल्द आवंटित करने की मांग की है
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने बताया कि स्कूलों में चौक, डस्टर, उपस्थिति रजिस्टर, झाड़ू, साबुन, फिनाइल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी पैसे नहीं हैं। विद्यालय संचालन बाधित नहीं हो, इसके लिए शिक्षक अपनी जेब से खर्च उठाने को मजबूर हैं।
शिक्षा वित्त विभाग और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की कागजी प्रक्रियाओं में फाइल उलझने के कारण समय पर राशि स्वीकृत नहीं हो पाती। वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर बजट लैप्स हो जाता है।
चालू वित्तीय वर्ष में राज्य के लगभग 35 लाख विद्यार्थियों वाले प्राथमिक व मध्य विद्यालयों के लिए अनुदान राशि की सख्त जरूरत है। स्टेशनरी, टीसी बुक, परीक्षा मूल्यांकन प्रपत्र और दाखिला रजिस्टर के अभाव में प्रशासनिक अभिलेखों का संधारण प्रभावित हो रहा है।
इसके अलावा, फंड नहीं मिलने से स्कूलों में मरम्मत कार्य, टूटे डेस्क-बेंच की ठीक-ठाक, चापाकल, बिजली वायरिंग और रंग-रोगन का काम पूरी तरह ठप पड़ा है। शौचालयों की सफाई नहीं होने से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। सबसे अधिक विकट स्थिति एकल शिक्षक वाले स्कूलों की है।
संघ ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक से अनुदान राशि जल्द आवंटित करने की मांग की है, परंतु अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे प्रभारियों को स्कूल संचालन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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