नई दिल्ली। दिवाली के त्योहार की शुरुआत धनत्रयोदशी यानी धनतेरस से होती है। इसे देवी लक्ष्मी, धन के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर और आयुर्वेद व स्वास्थ्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए समर्पित है। इस अवसर पर घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मकता लाने के लिए कई वस्तुओं को खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। धनतेरस 6 नवंबर को है।
हालांकि, हिंदू मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार धनतेरस के दिन कुछ खास चीजों को खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इन वस्तुओं को इस शुभ दिन घर लाना नकारात्मकता या आर्थिक रुकावटों का प्रतीक हो सकता है। सोना, चांदी, पीतल और तांबे के बर्तन की खरीदारी को शुभ माना जाता है।
इसे खरीदने से करें परहेज
धनतेरस के दिन चाकू, कैंची, ब्लेड या अन्य नुकीले औजार खरीदने से बचना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, ये वस्तुएं आपसी संबंधों में दरार, अलगाव और क्लेश का प्रतीक मानी जाती हैं।
लोहे का संबंध शनि देव से माना जाता है। चूंकि धनतेरस का दिन देवी लक्ष्मी और समृद्धि के स्वागत का होता है। इसलिए कई परिवारों में इस दिन लोहे से बनी वस्तुएं खरीदना अशुभ माना जाता है।
शुभ कार्यों और त्योहारों में काले रंग का प्रयोग आमतौर पर वर्जित माना जाता है, क्योंकि इसे नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। धनतेरस पर काले कपड़े, जूते या अन्य सामान खरीदने के बजाय लाल, पीले और सुनहरे जैसे चमकीले व शुभ रंगों को प्राथमिकता दी जाती है।
कांच या आसानी से टूटने वाली नाजुक वस्तुओं को घर लाने से बचा जाता है। कांच के आसानी से टूटने की प्रकृति को अस्थिरता और नुकसान का प्रतीक माना जाता है।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन खाना पकाने का तेल, सरसों का तेल या घी बाजार से खरीदकर घर लाना शुभ नहीं माना जाता। हालांकि, पूजा-पाठ और दीये जलाने के लिए इनका उपयोग निश्चित रूप से किया जाता है।
चमड़े से बने जूते, बेल्ट, पर्स या बैग जैसी वस्तुएं खरीदने से भी कई लोग परहेज करते हैं। चमड़ा पशु की खाल से बनता है, इसलिए पवित्रता और स्वच्छता के दृष्टिकोण से देवी लक्ष्मी के आगमन के दिन इसे घर लाना अनुकूल नहीं माना जाता।
धनतेरस पर नए बर्तन खरीदना बेहद लोकप्रिय और शुभ परंपरा है, लेकिन नया बर्तन खाली घर नहीं लाना चाहिए। मान्यता है कि नए बर्तन में थोड़ा जल, चावल, गेहूं, धनिया के बीज या मिठाई डालकर ही घर के भीतर प्रवेश करना चाहिए, जो कि अन्न-धन और समृद्धि का प्रतीक है।
भिन्न हो सकती है
ये नियम व परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों, समुदायों और परिवारों के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। धनतेरस का मूल संदेश प्रार्थना, आभार, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में सकारात्मकता का स्वागत करना है।
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