IAS शिखर अग्रवाल के बाद पत्नी IPS प्रशाखा माथुर भी APO, जानें पूरा मामला

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जयपुर। राजस्थान सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल के बाद अब उनकी पत्नी और 1995 बैच की वरिष्ठ IPS अधिकारी प्रशाखा माथुर को भी पदस्थापन की प्रतीक्षा (APO) सूची में डाल दिया गया है। कार्मिक विभाग के आदेश के अनुसार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (योजना, आधुनिकीकरण और कल्याण) के पद पर तैनात प्रशाखा माथुर को प्रशासनिक कारणों से अग्रिम आदेशों तक APO किया गया है।

इससे पहले 28 अक्टूबर को 1993 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी और उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर कार्यरत शिखर अग्रवाल को APO किया गया था। राज्य सरकार ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विस्तृत जांच को मंजूरी दे दी है।

ACB के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि शिखर अग्रवाल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक निजी होटल/रिसॉर्ट संचालक कंपनी गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड (अनंता रिसॉर्ट्स) को अनुचित लाभ पहुंचाया।

आरोप है कि श्री अग्रवाल, उनकी पत्नी IPS प्रशाखा माथुर, बेटों और अन्य परिजनों ने उदयपुर और अलवर के रिसॉर्ट्स में 40 विला व कॉटेज बाजार मूल्य से बेहद कम दरों (लगभग 15 से 16.5 लाख रुपये प्रति विला) पर खरीदे। इनमें से कई विला प्रशाखा माथुर के नाम भी पंजीकृत हैं।

एक ही दिन वित्तीय पैकेज और रजिस्ट्री: जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि जिस दिन (27 मार्च) राज्य के वित्त विभाग ने निजी कंपनी को विशेष रियायती वित्तीय पैकेज देने का आदेश जारी किया, ठीक उसी दिन 20 विला की रजिस्ट्री अग्रवाल और उनके परिवार के नाम पर कराई गई। कंपनी को निर्माण शर्तों में ढील देने और बिना उचित सत्यापन के मंजूरी दिलाने में मदद करने का भी आरोप है।

इस मामले पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केवल APO की कार्रवाई को नाकाफी बताया। पूरे मामले की जांच CBI और ED से कराने की मांग की।

श्री गहलोत ने सवाल उठाते हुए कहा कि ACB सीधे मुख्यमंत्री के अधीन काम करती है, जबकि आरोप उस बैठक के फैसलों से जुड़े हैं जिसकी अध्यक्षता खुद मुख्यमंत्री ने की थी। क्या राज्य सरकार की ACB इस मामले में निष्पक्ष जांच कर पाएगी? 6 करोड़ रुपये में 40 विला खरीदकर उन्हें वापस कंपनी को लीज पर देने की ऐसी योजना क्या आम जनता के लिए भी उपलब्ध है या केवल चहेते अधिकारियों के लिए बनाई गई थी?

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