अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव की परंपरा को किया गया
रांची। बड़कागढ़ रियासत, हटियागढ़ में इस वर्ष भी ऐतिहासिक दुर्गा पूजा एवं दशहरा विजय उत्सव समारोह का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास के साथ किया गया। यह आयोजन बुराई पर अच्छाई की जीत और रियासत की गौरवशाली परंपरा को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया, जिसका नेतृत्व बड़कागढ़ रियासत के उत्तराधिकारी राजेशनाथ शाहदेव ने किया।
बड़कागढ़ स्टेट का ऐतिहासिक इतिहास:
बड़कागढ़ स्टेट की स्थापना 1691 में ठाकुर ऐनी नाथ शाहदेव द्वारा की गई थी।
1857 ईस्वी के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने ‘रूल ऑफ प्रिमोजेनितर’ के तहत नेतृत्व करते हुए छोटानागपुर को अंग्रेजों से मुक्त कराकर स्वतंत्र राज्य की स्थापना की थी।
अंग्रेजों द्वारा 16 अप्रैल 1858 को जिला स्कूल रांची के प्रांगण में उन्हें सरेआम फांसी दे दी गई थी, जिसके बाद उनका परिवार अज्ञातवास और संघर्ष भरे दौर से गुजरा।
सांप्रदायिक सौहार्द और अनूठी परंपरा:
दुर्गा पूजा के दौरान पुर गांव के लोग और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर मां भगवती चिंतामणि की आराधना में सहयोग करते हैं।
मुस्लिम समुदाय के लोग मां की डोली ले जाने वाले मार्ग की सफाई और सजावट में विशेष योगदान देते हैं।
मां भगवती चिंतामणि की डोली को सजाने के लिए परिवार की बहू की पुरानी साड़ी का उपयोग करने की यह परंपरा 1880 ईस्वी से शुरू हुई थी जो आज भी निरंतर जारी है।
विजयादशमी महोत्सव व सहभोज की परंपरा:
अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के समय से ही हटियागढ़ में विजयादशमी के दिन मां भगवती चिंतामणि की पूजा के बाद भव्य विजय उत्सव मनाया जाता रहा है।
पूजा के पश्चात उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों और ग्रामीणों को प्रसाद (सहभोज) ग्रहण कराया जाता है तथा पान खिलाकर एवं विजयादशमी की शुभकामनाएं देकर विदा किया जाता है।
अपराजिता बंधन और आशीर्वाद की परंपरा:
परंपरा के अनुसार, राजपुरोहित सदन गोपाल शर्मा ने बड़कागढ़ राज परिवार के सभी सदस्यों को अपराजिता बांधकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया।
राजपुरोहित ने घर जाकर राज परिवार की बहुओं और बेटियों को अपराजिता बांधकर ‘सौभाग्यवती, सुख-समृद्धि एवं विजयी भव’ का आशीर्वाद प्रदान किया।
समारोह में प्रमुख रूप से उपस्थित गणमान्य लोग:
इस गरिमामयी आयोजन में लाल सचिंद्र देव, मीरा देवी, राखी शाहदेव, रेखा देव, बिपिन कुमार, लाल धर्मेंद्र देव, लाल सुरेंद्र देव, सदन गोपाल शर्मा, शैलेंद्र शाहदेव, शान प्रताप, मयंक प्रताप, हरेन्द्र भंजदेव, लता भांजदेव, प्रदीप जयसवाल, और भीखम उरांव सहित कई गणमान्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
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