
रांची। असम के गुवाहाटी स्थित श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में आयोजित 10 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में झारखंड के शिक्षक प्रतिभागियों ने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककला, परंपरा और वीर गाथाओं की आकर्षक प्रस्तुति देकर देशभर से आए प्रतिभागियों को झारखंड की विविधता से परिचित कराया।
झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) द्वारा चयनित छह शिक्षक इस राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग ले रहे हैं। 5 अक्टूबर 2026 से शुरू हुई इस कार्यशाला में देश के 18 राज्यों से 159 प्रतिभागी शामिल हुए हैं। 8 अक्टूबर को आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुति के दौरान झारखंड के शिक्षकों ने राज्य की विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में आरके उच्च विद्यालय बघिमा (पालकोट, गुमला) के नागपुरी शिक्षक रविंद्र साहू ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से झारखंड का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा को समर्पित लोकगीत की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर सभी का ध्यान आकर्षित किया।
उच्च विद्यालय आसबनी, पूर्वी सिंहभूम के गणित एवं विज्ञान शिक्षक अजीत कुमार महतो ने झारखंड के भौगोलिक एवं आर्थिक परिदृश्य की जानकारी साझा करते हुए देशभर से आए प्रतिभागियों को राज्य की प्राकृतिक एवं आर्थिक विशेषताओं से परिचित कराया।
पीएम श्री उच्च विद्यालय रोलाडीह, पश्चिमी सिंहभूम के शिक्षक जोसेफ टोपनो ने झारखंड की पारंपरिक सोहराय और कोहबर कला, खान-पान और पारंपरिक वेशभूषा के बारे में जानकारी दी।
राजकीय कृत उत्क्रमित उच्च विद्यालय तबला (चैनपुर, गुमला) के नागपुरी शिक्षक सिकंदर साहू ने भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव और परमवीर अल्बर्ट एक्का जैसे वीर सपूतों के त्याग एवं बलिदान से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
उत्क्रमित मध्य विद्यालय चोगा (सोनाहातू, रांची) की सहायक शिक्षिका श्रीमती शशि हेम्ब्रम ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत में झारखंड की विशिष्ट पहचान और वर्तमान उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने राज्य को भौगोलिक संकेतक प्राप्त प्रसिद्ध उत्पादों एवं परंपराओं के बारे में जानकारी देते हुए मांदर, रूगड़ा और कुचाई सिल्क सहित झारखंड की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक संपदाओं के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में राजकीय कृत उत्क्रमित उच्च विद्यालय बुंडू बेड़ा (नामकुम, रांची) की सहायक शिक्षिका श्रीमती रामेश्वरी सिंह ने झारखंड के प्रमुख पर्व-त्योहार सरहुल और करम एवं लोकगीत और लोकनृत्य की जानकारी साझा की।
उन्होंने पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख के लोकप्रिय गीतों “नागपुर कर कोरा” और “नदी नाला तक टुडू बन रे पतेरा” की मनमोहक प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में लोक संस्कृति का रंग भर दिया।
झारखंड के शिक्षक कलाकारों की इन प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों को राज्य की जनजातीय एवं लोक संस्कृति, कला, परंपरा, प्राकृतिक संपदा और वीरता की समृद्ध विरासत को करीब से जानने का अवसर मिला। इस प्रस्तुति ने राष्ट्रीय मंच पर झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
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