रोहतास। बिहार के रोहतास जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले की शकुंतला देवी की हत्या के आरोप में पति सहित ससुराल वाले जेल गए थे। एक सूचना पर झारखंड में कांति देवी के घर पुलिस को लेकर ससुराल के लोग पहुंचे। वहां अजीबोगरीब मामले का खुलासा हुआ।
वर्ष 2014 में नहर से बरामद एक महिला के शव की पहचान शकुंतला देवी के रूप में की गई थी। उनके पति और ससुराल पक्ष के लोगों पर हत्या का मामला दर्ज हुआ। गिरफ्तारियां हुईं। परिवार को वर्षों तक कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
अधिवक्ता शहनवाज अहमद के अनुसार, शकुंतला देवी की शादी वर्ष 2002 में अरुण मेहता से हुई थी। वकील का दावा है कि वैवाहिक घर में बार-बार विवाद होते थे। शकुंतला ने अपने परिवार को बताया था कि ससुराल पक्ष दहेज को लेकर उसे परेशान कर रहा है।
बताया गया है कि शकुंतला वर्ष 2014 में घर से चली गई थीं। परिवार के अनुसार, उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिलने पर 20 अगस्त, 2014 को उनके भाई ने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। शुरुआती मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A तथा दहेज निषेध अधिनियम की धाराएं 3 और 4 लगाई गई थीं।
गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होने के दो दिन बाद, डेहरी मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खंडा गांव के पास एक नहर से महिला का शव बरामद हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, शकुंतला के भाई और एक स्थानीय चौकीदार ने शव की पहचान शकुंतला देवी के रूप में की।
शव का पोस्टमार्टम कराया गया। बाद में रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी गई। भाई के बयान के आधार पर मामले में हत्या से संबंधित धाराएं भी जोड़ दी गईं। इसके बाद शकुंतला के पति अरुण मेहता, उनके पिता दिलीप मेहता और भाई गोविंद कुमार समेत अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
परिवार के वकील का कहना है कि अरुण को जेल में समय बिताना पड़ा। बाद में उन्हें जमानत मिल गई, जबकि मामले की कानूनी कार्यवाही जारी रही।
परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता शहनवाज अहमद ने दावा किया कि बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ। उनके अनुसार, शकुंतला के परिवार की ओर से कथित तौर पर 8 लाख रुपये की मांग की गई थी।
वकील का दावा है कि रकम जुटाने के लिए दिलीप मेहता को अपनी करीब साढ़े तीन कट्ठा पुश्तैनी जमीन बेचनी पड़ी। समझौते के बाद मामला समाप्त हो गया और परिवार तथा पुलिस रिकॉर्ड में यह धारणा बनी रही कि शकुंतला की मृत्यु हो चुकी है।
हालांकि, समझौते और उसके तहत कथित भुगतान से संबंधित इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।
करीब दो महीने पहले दिलीप मेहता को सूचना मिली कि उनकी बहू को झारखंड के एक गांव में देखा गया है। अधिवक्ता के अनुसार, दिलीप और कुछ अन्य लोग वहां पहुंचे। उन्होंने महिला को पहचान लिया। हालांकि, कथित तौर पर उस समय वे उससे कुछ कहने को लेकर डर रहे थे।
इसके बाद परिवार ने रोहतास के पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया। पुलिस ने सूचना के आधार पर जांच शुरू की। महिला को झारखंड के गढ़वा जिले के कांडी थाना क्षेत्र के लभरी गांव से बरामद किया।
पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, महिला वहां कांति देवी के नाम से रह रही थी। उसके साथ रट्टू सिंह नामक व्यक्ति भी रह रहा था। पुलिस उसे रोहतास लेकर आई, जहां सासाराम की अदालत में पेश किया गया।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, मामले की जांच नए सिरे से की जा रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वर्ष 2014 में नहर से बरामद शव वास्तव में किस महिला का था और उसकी पहचान शकुंतला देवी के रूप में कैसे हुई।
अधिकारी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद, यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता या गलत कार्य सामने आता है, तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शकुंतला देवी के जीवित मिलने के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने अपने ससुराल पक्ष को झूठे मामले में फंसाया और धोखाधड़ी एवं आपराधिक साजिश में शामिल रहीं।
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