
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के श्रीनगर से लोकसभा सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने शुक्रवार को संसद सदस्यता और पार्टी—दोनों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने पार्टी संरक्षक फारूक अब्दुल्ला की सार्वजनिक चुनौती को स्वीकार कर लिया है।
3 नवंबर को भेजेंगे इस्तीफा
सांसद आगा रुहुल्लाह ने बताया कि वे 3 नवंबर को औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजेंगे। यह तारीख उनके पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि भी है, जिनकी आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी।

फारूक को लिखा तीखा पत्र
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को लिखे एक पत्र में मेहदी ने पार्टी के दोहरे रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, ‘मुझे याद है कि आप उस विधानसभा के मुख्यमंत्री थे जिसने स्वायत्तता प्रस्ताव पारित किया था। उसमें भी साहस की जरूरत थी। फिर आज जम्मू-कश्मीर के लिए संवैधानिक गारंटियों का महज जिक्र करना इतना नागवार क्यों गुजर रहा है कि आपको सार्वजनिक रूप से मेरा इस्तीफा मांगना पड़ा?’
धारा 370 का जिक्र किया
श्री मेहदी ने 5 अगस्त 2019 को निरस्त किए गए आर्टिकल 370 का जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि कश्मीरियों की गरिमा, सम्मान, संवैधानिक अधिकारों और स्वतंत्रता को बहाल करने की लड़ाई का प्रतीक है।
अधिकारों की उठाई बात
सांसद ने पत्र में जम्मू-कश्मीर की जमीनी स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए लिखा कि राज्य की 65% आबादी युवा है, लेकिन बिना नौकरियों और अवसरों के उनका भविष्य अनिश्चित है। हमारी ज़मीन और संसाधनों का लाभ दूसरों को मिल रहा है, जबकि स्थानीय लोग इससे वंचित हैं। हमारे धार्मिक अधिकारों, परंपराओं और भाषा पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
NC से बढ़ता मतभेद
श्री मेहदी पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। उनका आरोप था कि पार्टी आर्टिकल 370 और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई को छोड़कर केवल राज्य के दर्जे तक सीमित हो गई है। कार्यसमिति के सदस्य होने के बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण बैठकों से दूर रखा जा रहा था।
दोनों पक्षों के बीच दरार 23 दिसंबर 2024 को तब और चौड़ी हो गई थी, जब मेहदी ने केंद्र शासित प्रदेश की आरक्षण नीति के खिलाफ उमर अब्दुल्ला के गुपकार स्थित आवास के बाहर छात्रों के एक बड़े विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। उस दौरान उमर ने छात्र प्रतिनिधियों से तो बात की, लेकिन मेहदी को नजरअंदाज कर दिया था।
फारूक ने साधा था निशाना
इसी हफ्ते फारूक अब्दुल्ला ने मेहदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थन के बिना संसदीय चुनाव नहीं जीत सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि मेहदी खुद को आर्टिकल 370 का सबसे बड़ा पैरोकार दिखाने की कोशिश कर रहे हैं और “गलत रास्ते” पर हैं। इसके जवाब में ही अब रुहुल्लाह ने पार्टी और संसद दोनों छोड़ने का बड़ा फैसला लिया है।
ये चुनौती दी थी
फारूक अब्दुला ने लोकसभा सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी को लगातार पार्टी नेतृत्व की आलोचना करने के बजाय अपने दम पर चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी।
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