- पवेलियन में आए देश-विदेश के आगंतुकों का जीता रहा है दिल
रांची। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 17 जुलाई तक आयोजित भारत टेक्स-2026 में झारखंड पवेलियन देश-विदेश से आए आगंतुकों, उद्योग प्रतिनिधियों, डिजाइनरों, निर्यातकों एवं खरीदारों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। राज्य की समृद्ध हस्तकरघा परंपरा, जनजातीय कला, जीआई टैग प्राप्त उत्पादों और स्थानीय शिल्प कौशल को प्रदर्शित करता यह पवेलियन बड़ी संख्या में आगंतुकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

आगंतुक झारखंड के विशिष्ट हस्तशिल्प एवं हस्तकरघा उत्पादों में गहरी रुचि दिखाते हुए उनकी गुणवत्ता, पारंपरिक निर्माण तकनीक और सांस्कृतिक विरासत की सराहना कर रहे हैं। जीआई टैग प्राप्त उत्पाद ने झारखंड की पारंपरिक बुनाई और शिल्पकला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के साथ-साथ स्थानीय बुनकरों एवं कारीगरों के लिए नए बाजार एवं आर्थिक अवसरों के द्वार भी खोले हैं
झारखंड पवेलियन की सबसे बड़ी विशेषता राज्य के हाल ही में जीआई टैग प्राप्त पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन है। पवेलियन में तसर सिल्क, कुचाई सिल्क, भगैया साड़ी एवं फैब्रिक, दुमका चादर, भोया साड़ी एवं फैब्रिक तथा पांची साड़ी एवं फैब्रिक को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। इन उत्पादों को मिले जीआई टैग ने न केवल झारखंड की पारंपरिक बुनाई और शिल्पकला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है, बल्कि स्थानीय बुनकरों और कारीगरों के लिए नए बाजार एवं आर्थिक अवसरों के द्वार भी खोले हैं।
झारखंड पवेलियन में प्रदर्शित जीआई टैग प्राप्त उत्पाद राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक बुनाई कला की विशिष्ट पहचान हैं।
तसर सिल्क अपनी प्राकृतिक चमक, मजबूती और उत्कृष्ट बनावट के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। झारखंड भारत के प्रमुख तसर उत्पादक राज्यों में से एक है और यहां का तसर सिल्क अपनी गुणवत्ता एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया के कारण विशेष पहचान रखता है।
कुचाई सिल्क सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई क्षेत्र की विशिष्ट रेशम परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी महीन बुनाई, आकर्षक बनावट और प्राकृतिक रंग इसे अन्य रेशमी वस्त्रों से अलग पहचान देते हैं।
भगैया साड़ी एवं फैब्रिक साहिबगंज जिले के भगैया गांव के कारीगरों द्वारा तैयार की जाती है। प्राकृतिक रंगों, पारंपरिक डिजाइनों और हस्तनिर्मित बुनाई के कारण यह उत्पाद झारखंड की ग्रामीण शिल्प परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है।
दुमका चादर संताल परगना क्षेत्र की पारंपरिक हस्तकरघा कला का प्रतीक है। सूती धागों से बनी यह चादर अपनी मजबूती, आरामदायक बनावट और पारंपरिक बॉर्डर डिजाइनों के लिए जानी जाती है तथा घरेलू उपयोग के साथ-साथ सजावटी वस्तु के रूप में भी लोकप्रिय है।
भोया साड़ी एवं फैब्रिक अपनी विशिष्ट पारंपरिक बुनाई, आकर्षक रंग संयोजन और जनजातीय कलात्मकता के लिए प्रसिद्ध है। यह उत्पाद झारखंड की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय कारीगरों की उत्कृष्ट शिल्पकला को दर्शाता है।
पांची साड़ी एवं फैब्रिक झारखंड की पारंपरिक आदिवासी संस्कृति से प्रेरित है। इसकी पहचान आकर्षक ज्यामितीय आकृतियों, पारंपरिक डिजाइनों और हस्तनिर्मित बुनाई से होती है। यह स्थानीय शिल्प कौशल और सांस्कृतिक विरासत का सशक्त प्रतीक है।
यहां सीधे पढ़ें खबरें
खबरें और भी हैं। इसे आप अपने न्यूज वेब पोर्टल dainikbharat24.com पर सीधे भी जाकर पढ़ सकते हैं। नोटिफिकेशन को अलाउ कर खबरों से अपडेट रह सकते हैं। साथ ही, सुविधा के मुताबिक अन्य खबरें भी पढ़ सकते हैं।
आप अपने न्यूज वेब पोर्टल से फेसबुक, इंस्टाग्राम, X, स्वदेशी एप arattai सहित अन्य सोशल मीडिया पर भी जुड़ सकते हैं। खबरें पढ़ सकते हैं। सीधे गूगल हिन्दी न्यूज पर जाकर खबरें पढ़ सकते हैं। अपने सुझाव या खबरें हमें dainikbharat24@gmail.com पर भेजें।
हमारे साथ जुड़ें
व्हाट्सएप ग्रुप
https://chat.whatsapp.com/H5n5EBsvk6S4fpctWHfcLK
स्वदेशी एप ग्रुप
https://chat.arattai.in/groups/t43545f313238383036363337343930333731343936395f32303030323937303330392d47437c3031303131353032363138323137353934323036313934393230

