लखनऊ। उत्तर प्रदेश के 4,000 से अधिक गैर-सहायता प्राप्त और बिना मान्यता वाले मदरसों में विदेशी फंडिंग की चल रही जांच को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी खबर आई है। अदालत ने उत्तर प्रदेश पुलिस की एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) और विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है।

इस फैसले के बाद जांच एजेंसियों को पूरी तरह से ‘ग्रीन सिग्नल’ मिल गया है। अब मदरसों के बैंक खातों, वित्तीय दस्तावेजों और अज्ञात आय स्रोतों की छानबीन और तेज हो जाएगी।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने ‘मदरसा मैनेजमेंट कमेटी’ और ‘टीचर्स एसोसिएशन, मदारिस अरबिया’ द्वारा दायर की गई उस याचिका को खारिज कर दिया। इसमें 9 दिसंबर, 2025 के सरकारी आदेश को चुनौती देते हुए एटीएस जांच पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
अदालत ने स्पष्ट रूप से माना कि केवल जांच शुरू करना या पूछताछ करना किसी के खिलाफ दंडात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे जांच से घबराएं नहीं। जांच प्रक्रिया के दौरान उन्हें समिति के समक्ष अपने सारे दस्तावेज और जवाब प्रस्तुत करने का पूरा मौका मिलेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार को खुफिया एजेंसियों से ऐसी जानकारियां मिली थीं कि राज्य के करीब 4,000 मदरसों (विशेषकर नेपाल सीमा से सटे इलाकों में) में बड़े पैमाने पर विदेशों से अज्ञात स्रोतों से पैसा आ रहा है। सरकार के निर्देशों के मुताबिक, कई मदरसों के पास आय का कोई ठोस या स्थायी जरिया नहीं है, लेकिन इसके बावजूद वे बहुत बड़ी और भव्य इमारतों में चल रहे हैं।
मदरसा संचालकों के पास इन इमारतों के निर्माण और पैसों के वैध स्रोतों से जुड़े सही वित्तीय दस्तावेज नहीं मिल पा रहे थे। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मामले की तह तक जाने के लिए एटीएस के आईजी के नेतृत्व में एक एसआईटी (SIT) का गठन किया गया था।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने पहले ही जिला अल्पसंख्यक अधिकारियों (DMOs) को निर्देश जारी कर रखे हैं। अब एटीएस बिना किसी कानूनी अड़चन के इन 4,000 से अधिक संस्थानों और उनके प्रबंधकों के बैंक खातों, विदेशों से आए फंड और स्थानीय स्तर पर मिलने वाले अज्ञात दानों की गहनता से कड़ियों को जोड़ सकेगी।
सूत्रों के अनुसार, यह जांच अब अपने अंतिम चरण में है। हाई कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद एटीएस-एसआईटी तेजी से सभी पहलुओं की जांच पूरी कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
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