असम। असम विधानसभा ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए UCC Bill 2026 को बुधवार को पारित कर दिया। इसके साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद UCC लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है। यह विधेयक मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली BJP सरकार ने पेश किया था।
हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बिल को “महिलाओं के अधिकार और समान नागरिक कानून” की दिशा में बड़ा कदम बताया। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समान कानून लागू करना है।
बिल के प्रमुख प्रावधानों में बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल है। अब किसी भी समुदाय में एक से अधिक विवाह कानूनन अपराध माना जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, बहुविवाह या द्विविवाह पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है।
इसके अलावा राज्य में सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। तलाक के रजिस्ट्रेशन को भी कानूनी रूप से जरूरी बनाया गया है। सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी।
सबसे ज्यादा चर्चा लिव इन रिलेशनशिप को लेकर बने नए नियमों की हो रही है। नए कानून के तहत लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना संबंध रजिस्टर कराना होगा। ऐसा नहीं करने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि असम की जनजातीय (ST) समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि उनकी पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक प्रथाएं प्रभावित न हों।
विपक्षी दलों-खासकर कांग्रेस, टीएमसी और Raijor Dal ने इस बिल का विरोध किया। विपक्ष ने मांग की थी कि इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए। व्यापक चर्चा कराई जाए, लेकिन सरकार ने बहुमत के आधार पर बिल पास करा लिया।
असम सरकार का कहना है कि यह कानून “समानता और न्याय” के सिद्धांत पर आधारित है, जबकि आलोचकों का आरोप है कि यह व्यक्तिगत धार्मिक कानूनों में हस्तक्षेप है। UCC को लेकर देशभर में राजनीतिक और कानूनी बहस तेज होने की संभावना है।
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