पटना। बिहार से बड़ी खबर आई है, अपनी गाड़ियों पर जातिसूचक शब्द लिखवाना अब भारी पड़ सकता है। आइए जानते हैं पूरा मामला…
सड़क पर चलते वक्त आपने ऐसी गाड़ियां जरूर देखी होंगी, जिन पर ‘गुर्जर’, ‘राजपूत’, ‘जाट’, ‘यादव’, ‘पंडित’ या इसी तरह के जातिसूचक शब्द बड़े-बड़े अक्षरों में लिखे होते हैं।
कई लोग इसे स्टाइल और पहचान का हिस्सा मानते हैं, लेकिन बिहार में अब ऐसा करना महंगा पड़ सकता है। परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि वाहनों पर लगे जातिसूचक शब्द और स्टीकर हटाने होंगे, वरना चालान कट सकता है।
दरअसल, बिहार सरकार अब ट्रैफिक सिस्टम को ज्यादा सख्त और टेक्नोलॉजी बेस्ड बनाने की तैयारी में है। इसी के तहत परिवहन विभाग ने ऐसे वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया है, जिन पर जाति से जुड़ी पहचान लिखी हुई है।
विभाग ने सभी वाहन मालिकों को एक महीने का समय दिया है, ताकि वे अपने वाहनों से ऐसे शब्द और स्टीकर हटा लें।
परिवहन विभाग के मुताबिक, तय समय के बाद अगर किसी व्हीकल पर जातिसूचक शब्द या स्टीकर मिला, तो मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 177 और 179 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
नियम तोड़ने वालों से 2 हजार रुपये तक जुर्माना वसूला जा सकता है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे समय रहते अपने वाहन से ऐसे शब्द हटा लें, ताकि बाद में कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े।
इसी के साथ बिहार में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को तेजी से लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत राज्यभर में 500 से 700 जगहों पर AI कैमरे लगाए जाएंगे, जो ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की पहचान कर ई-चालान जारी कर सकेंगे।
इन कैमरों में ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकगनिशन, फेसियल रिकग्निशन और सर्विलांस जैसी टेक्नोलॉजी भी शामिल होगी। सरकार का दावा है कि इससे ट्रैफिक नियमों का पालन बेहतर होगा, सड़क हादसों में कमी आएगी और बार-बार नियम तोड़ने वालों पर नजर रखना आसान होगा।
परिवहन विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को उन जगहों की पहचान करने को कहा है, जहां सबसे ज्यादा ट्रैफिक रहता है या अक्सर एक्सीडेंट और ट्रैफिक नियम तोड़ने की घटनाएं सामने आती हैं।
सरकार की योजना है कि AI कैमरों वाला यह सिस्टम हाईवे, बड़े शहरों, टोल प्लाजा और ज्यादा भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगाया जाए, ताकि ट्रैफिक पर बेहतर नजर रखी जा सके।
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