- सर्पदंश के हर मामले की करनी होगी रिपोर्टिंग
रांची। राज्य में सर्पदंश से होने वाली मौतों के बढ़ते आंकड़ों और ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त कुरीतियों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी 2 मार्च को जारी अधिसूचना के अनुसार अब राज्य भर में सर्पदंश के मामले एवं मृत्यु को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित बीमारी घोषित कर दिया गया है।
यह कदम भारत सरकार के ‘नेशनल एक्शन प्लान फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ स्नेकबाइट एनवेनोमिंग 2030 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिसके तहत वर्ष 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों और विकलांगता में 50 प्रतिशत तक की कमी लाने का लक्ष्य है।
भारत में दुनिया के किसी भी देश की तुलना में सर्पदंश से होने वाली मौतों की संख्या सर्वाधिक है, जहां प्रति वर्ष लगभग 3-4 मिलियन मामले सामने आते हैं। लगभग 58,000 मौतें होती हैं।
झारखंड में मानसून और उमस भरी गर्मी के दौरान ग्रामीण, जनजातीय और कृषि क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाएं अचानक बढ़ जाती हैं। चिंता का विषय यह है कि लोग आधुनिक इलाज के बजाय झाड़-फूंक और ओझा-गुणी के कुचक्र में फंस जाते हैं, जो मृत्यु दर में वृद्धि का एक प्रमुख कारण है।
इसे देखते हुए, राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 से ही ‘स्नेक बाइट प्रिवेंशन एंड कंट्रोल प्रोग्राम’ की शुरुआत की है, जिसके तहत मेडिकल कॉलेजों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन की उपलब्धता अनिवार्य की गई है।
इस आदेश के अनुसार, अब राज्य के सभी सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों, जिनमें निजी मेडिकल कॉलेज, कॉर्पोरेट स्वास्थ्य सेवा प्रदाता, रेलवे, आर्मी और आयुष अस्पताल भी शामिल हैं, के लिए सर्पदंश के हर मामले की रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा।
क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और स्टेट पब्लिक हेल्थ एक्ट के प्रावधानों के तहत, अब सर्पदंश से संबंधित डेटा का संधारण आईडीएसपी-आईएचआईपी पोर्टल पर अनिवार्य रूप से किया जाएगा। सभी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहाँ एक विशेष पंजी संधारित करें।
प्रत्येक माह की 5वीं एवं 20वीं तारीख तक पाक्षिक प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से सिविल सर्जन को सौंपें। इसके पश्चात, जिले के सिविल सर्जन हर महीने की 10 तारीख तक समेकित रिपोर्ट विभाग को प्रेषित करेंगे।
इसका मुख्य उद्देश्य सर्पदंश के सटीक आंकड़े जुटाना है, ताकि उनके आधार पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक नीतियों का निर्धारण किया जा सके। इस डेटा के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में अनुसंधान, चिकित्सा संस्थानों की स्थापना और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने आदेश देते हुए स्पष्ट कहा है नेशनल स्नेकबाइट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाएगा और सामुदायिक स्तर पर व्यापक जागरुकता अभियान चलाए जाएंगे।
राज्यपाल के आदेश से निर्गत यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू मानी जाएगी। लापरवाही बरतने वाले संस्थानों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


