नई दिल्ली। SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला दिया है। साथ ही ममता सरकार के रवैये पर न्यायालय ने सख्त रुख भी अपनाया है।
दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य में चल रहे वोटर लिस्ट स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है।
देश की सबसे बड़ी अदालत ने SIR के लिए पर्याप्त संख्या में ‘ए’ ग्रेड के ऑफिसर उपलब्ध नहीं कराने पर बंगाल सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को आदेश दिया कि वे SIR के लिए लीगल ऑफिसर्स की तैनाती करें। साथ ही रिटायर्ड जजों की भी तलाश करें।
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लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट में शामिल लोगों के दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए लीगल ऑफिसर नियुक्त करने के आदेश।
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट से कहा- मुख्य सचिव, डीजीपी और निर्वाचन आयोग के अधिकारियों समेत सभी स्टेकहोल्डर्स की बैठक बुलायें।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी को बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पब्लिश करने की अनुमति दी। सप्लीमेंट्री लिस्ट बाद में भी जारी की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेवारत और पूर्व न्यायिक अधिकारी तार्किक विसंगति सूची में शामिल लोगों के दावों और आपत्तियों पर फैसला करेंगे।
वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवजीन के लिए ‘ए’ ग्रेड अफसर उपलब्ध नहीं कराने पर सुप्रीम कोर्ट बंगाल सरकार से नाराज।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कलकत्ता हाईकोर्ट के जज बंगाल में एसआईआर में मदद के लिए लीगल ऑफिसर्स उपलब्ध करायें और पूर्व जजों की तलाश करें।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वोटर लिस्ट का प्रकाशन नहीं रुकेगा। कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह 28 फरवरी 2026 को वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट जारी कर सकता है।
कहा कि इसके बाद सप्लीमेंट्री लिस्ट भी जारी कर सकते हैं। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विवादों से घिरी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग की सहायता के लिए वर्किंग और रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जजों की तैनाती का शुक्रवार को निर्देश दिया।
निर्वाचन आयोग और तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के बीच ‘दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप’ पर खेद जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने राज्य में SIR प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई नये निर्देश जारी किये।
पीठ ने तार्किक विसंगति सूची (लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट) में शामिल व्यक्तियों के दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का आदेश दिया।
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