- 2030 तक रेबीज मुक्त झारखंड बनाने को लेकर दिशा-निर्देश जारी
रांची। रेबीज के खतरों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक स्तर पर अभियान चलाने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने 13 फरवरी को सभी जिलों के सिविल सर्जन को पत्र लिखकर एनिमल बाइट मैनेजमेंट और पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य वन हेल्थ अप्रोच के माध्यम से वर्ष 2030 तक झारखंड को रेबीज मुक्त बनाना है।
अभियान निदेशक ने निर्देश दिया है कि अब राज्य के सभी जिला अस्पतालों को मॉडल एंटी रेबीज क्लिनिक के रूप में विकसित किया जाए। इन क्लिनिकों में विशेष रूप से डेडिकेटेड वुंड वाशिंग एरिया बनाया जाए, जहां कुत्ता या अन्य जानवर के काटने पर मरीज के घाव को कम से कम 15 मिनट तक बहते पानी और साबुन से धोने की व्यवस्था होगी।
अभियान निदेशक ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रो तक एंटी रेबीज वैक्सीन और एंटी रेबीज सीरम की उपलब्धता सुनिश्चित करने का दिया निर्देश दिया है। विदित हो कि वन हेल्थ अप्रोच के परिप्रेक्ष्य में हयूमन रेबीज को झारखंड के स्वास्थ्य विभाग की 21 अक्टूबर, 2023 की अधिसूचना के माध्यम से राज्य में एक नोटिफायबल डिजीज के रूप में अधिसूचित किया गया है।
अब राज्य में डॉग बाइट के हर मामले की रिपोर्टिंग अनिवार्य रूप से आईएचआईपी-आईडीएसपी पोर्टल पर की किया जाना अनिवार्य है। टीकाकरण के नए प्रोटोकॉल के तहत अब इंट्रा-डर्मल रूट से 0.1 मिली की खुराक निर्धारित दिनों (0, 3, 7 और 28वें दिन) पर दी जाएगी। गंभीर मामलों में डॉक्टरों की सलाह पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन का प्रयोग सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जागरुकता रथ भी रवाना की किया है, जो आगामी दो महीनों तक जिलों में घूम-घूम कर लोगों को जागरूक करेंगी। इसके अलावा नगर निकायों, पंचायती राज संस्थाओं और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से स्कूलों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
सभी सिविल सर्जन को यह भी निर्देश दिया गया है कि अस्पतालों में तैनात मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ को एनिमल बाइट मैनेजमेंट के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि मरीजों को त्वरित और सही उपचार मिल सके।


