न्‍यायालय के आदेश के बाद भी पंचायत सचिव पर कार्रवाई नहीं

झारखंड
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  • जिला प्रशासन पर बचाने का आरोप

आनंद कुमार सोनी

लोहरदगा। भारतीय सूचना अधिकार रक्षा मंच ने पंचायत सचिव विश्वनाथ प्रजापति पर गंभीर भ्रष्टाचार, गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए। जिला प्रशासन पर उन्हें संरक्षण देने का आरोप लगाया।

मंच के जिला अध्यक्ष शकील अख्तर ने कहा कि पंचायत सचिव विश्वनाथ प्रजापति के विरुद्ध थाना सेंहा में कांड (संख्या 85/2024, दिनांक 17.09.2024) दर्ज है। तत्कालीन सेन्हा प्रखंड विकास पदाधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनपर ₹1,46,860 के गबन का स्पष्ट आरोप है। इसके बावजूद आरोपी पंचायत सचिव से ना तो समय पर राशि वसूल की गई और न ही कोई विभागीय कार्रवाई हुई।

श्री अख्‍तर ने बताया कि मामले में विश्वनाथ प्रजापति द्वारा सिविल कोर्ट एवं उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन झारखंड उच्च न्यायालय ने 27 जून 2025 (एबीएन संख्या 1337/2025) को स्पष्ट आदेश दिया कि जब तक गबन की राशि एवं जुर्माना जमा नहीं किया जाएगा, तब तक किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा। न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी के आदेश के बाद आरोपी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से गबन स्वीकार करते हुए राशि व जुर्माना जमा किया।

8 जुलाई 2025 को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति आनंद सेन ने भी आदेश को बल दिया। इसके बावजूद जिला प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्‍हें बार-बार ऐसे प्रखंडों में पदस्थापित किया गया, जहां 14वें और 15वें वित्त आयोग की भारी राशि उपलब्ध रहती है। वर्तमान में किस्को प्रखंड में तीन पंचायतों का प्रभार मिलने के बाद भी विश्वनाथ प्रजापति द्वारा लगातार घोटाला, वित्तीय अनियमितता और रिश्वतखोरी की जा रही है।

शकील अख्तर ने मांग की कि पंचायत सचिव विश्वनाथ प्रजापति के पूरे 10 वर्षों के कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच हो। 14वें व 15वें वित्त आयोग की सभी योजनाओं की विशेष ऑडिट कराई जाए। सभी वाउचर, बिल, मास्टर रोल, वेंडर खातों, स्वयं व रिश्तेदारों के बैंक खातों की एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से जांच कराई जाए। सरकारी अभिलेख घर पर रखने की भी जांच हो। तत्काल निलंबित कर विभागीय कार्रवाई के तहत बर्खास्त किया जाए।

बताते चलें कि 2020 में जब पंचायत सचिव सदर प्रखंड की हिरही पंचायत में पदस्‍थापित थे, तब मनरेगा में इनके द्वारा भारी अनियमितता की गई थी।

फरवरी, 2020 में हेन्दलासों निवासी सुनील राम ने मनरेगा में की गई गड़बड़ी की जानकारी आरटीआई से मांगी थी। उसे 14 सितंबर, 2020 को पिस्टल दिखाकर जान से मारने एवं झूठा आरोप लगाकर फंसाने की धमकी दी गयी थी। इसकी लिखित सूचना प्रखंड विकास पदाधिकारी, उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक को सुनील राम ने दी थी। हालांकि किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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