गुमला। मात्स्यिकी विज्ञान महाविद्यालय में मत्स्य किसानों के लिए मछली पालन की तकनीक पर पांच दिवसीय आवासीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की की प्रेरणा और मत्स्य निदेशालय के सहयोग से आयोजित किया गया।
इस प्रशिक्षण में 26 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया, जिनमें 9 महिलाएं एवं 17 पुरुष शामिल थे। ये सभी प्रशिक्षणार्थी गुमला एवं सिमडेगा जिले से थे। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को मिश्रित मछली पालन, जलकृषि में पानी और मिट्टी की गुणवत्ता की जांच एवं प्रबंधन की जानकारी दी गई।
किसानों को बायोफ्लॉक तकनीक द्वारा मछली पालन की पद्धति, मछली आहार का निर्माण एवं प्रबंधन, रंगीन मछलियों का प्रजनन एवं रख-रखाव, मछली पालन में रोजगार के अवसर से सम्बंधित विषयों पर व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक जानकारी विस्तार पूर्वक दी गयी।
इसके अतिरिक्त प्रशिक्षणार्थियों को मछलियों के मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें मछली कटलेट, मछली समोसा, मछली सैंडविच एवं मछली मोमो शामिल थे। किसानों ने न केवल इन उत्पादों को बनाना सीखा, बल्कि उनकी बिक्री से संबंधित व्यवहारिक अनुभव भी प्राप्त किया।
सभी प्रशिक्षणार्थियों ने प्रशिक्षण के उपरांत अपने अनुभव साझा करते हुए अत्यंत खुशी और संतोष व्यक्त किया। समापन सत्र में जिला मत्स्य पदाधिकारी श्रीमती कुसुमलता ने किसानों को प्रोत्साहित किया। सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए।
यह प्रशिक्षण महाविद्यालय के सह-अधिष्ठाता डॉ. ए.के. सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इसमें महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापकों डॉ. प्रसान्त जाना, डॉ. श्वेता कुमारी, डॉ. कस्तूरी चट्टोपाध्याय, डॉ. ओम प्रवेश कुमार रवि, डॉ. के. एस. विसडम, डॉ मनमोहन कुमार, डॉ. मोहम्मद अशरफ मलिक के साथ-साथ अन्य सभी सहायक प्राध्यापकों, गैर शैक्षणिक कर्मचारी, श्रीमती रेशमी सिंह एवं संजय नाथ पाठक का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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