
रांची। भारतीय मजदूर संघ के कोयला उद्योग प्रभारी सह जेबीसीसीआई सदस्य के लक्ष्मण रेड्डी ने कहा कि कोयला मंत्रालय से सीएमपीएफ संभाल नहीं रहा है। वादा के बावजूद 2 साल में इसे पूर्ण रूप से ऑनलाइन नहीं किया जा सका है। अभी भी मात्र 70% काम ही हुआ है। अगर सीएमपीएफ संभाल नहीं रहा है तो इसे श्रम मंत्रालय के अधीन कर दिया जाए। श्री रेड्डी 29 अगस्त को मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
श्री रेड्डी ने कहा कि कोयला कर्मियों को रिटायरमेंट के दिन ही सभी तरह के देयता का भुगतान कर दिया जाना चाहिए। हालांकि ऐसा नहीं हो रहा है। सीएमपीए अब तक कर्मियों की 900 करोड़ रुपए की गाढ़ी कमाई को डूबा चुका है। इसकी जांच भी नहीं की जा रही है। यहां से कर्मियों को सुविधा मिलने की जगह काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
श्री रेड्डी ने कहा कि सीएमपीएफ महज कुछ लाख कर्मियों का ही लेखा-जोखा रखता है। इसके उलट इपीएफओ देश भर के करोड़ों कर्मियो का लेखा-जोखा रख रहा है। वह आधुनिकतम सुविधाएं अपने सदस्यों को उपलब्ध करा रहा है। वहां तो अब कार्ड से भी ईपीएफ के पैसे लेने का प्रावधान कर दिया गया है।
श्री रेड्डी ने कहा कि कोयला उद्योग में बड़ी साजिश रची जा रही है। उद्योग को बचाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष करना होगा। इसमें मजदूरों के साथ-साथ खदान के आसपास के लोगों और वहां व्यापार करने को वालों को भी इसके बारे में जानकारी देनी होगी। इस दिशा में बीएमएस ने अभियान शुरू कर दिया है।
श्री रेड्डी ने कहा कि 17 सितंबर तक मजदूर जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत गेट, पीट और पब्लिक मीटिंग की जा रही है। इसी क्रम में 12 सितंबर को कोल इंडिया और उसकी सभी सहायक कंपनियों के जीएम कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद आंदोलन की समीक्षा की जाएगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी।
श्री रेड्डी ने कहा कि बीएमएस हमेशा से मजदूर संगठनों को एक मंच पर लाने का पक्षधर है। हालांकि संघ का मानना है कि ऐसा करने के लिए राजनीति छोड़कर मजदूर संगठनों को इसमें शामिल होना होगा। कई मजदूर संगठन बैठक में पार्टी का निर्देश लेकर आते हैं या उचित नहीं है।
श्री रेड्डी ने कहा कि बीएमएस ठेका मजदूरों के हित के लिए लगातार काम कर रही है। संघ का मानना है कि कोल इंडिया में कंपनी के कर्मियो के उत्पादन का अनुपात बढ़कर 50% करना चाहिए। शेष 50% उत्पादन ठेका मजदूरों से की जा सकती है। इस दिशा में प्रबंधन को गंभीरता से सोचना चाहिए।
श्री रेड्डी ने कहा कि कंपनी के खाली पड़े घरों को ठेका मजदूरों को आवंटित करना चाहिए या सेवानिवृत्त कामगारों को एलॉट कर देना चाहिए। ठेका मजदूर को मेडिकल सुविधा भी प्रदान की जानी चाहिए। उन्हें अभी भी हाई पावर कमेटी द्वारा निर्धारित मानदेय का भुगतान अधिकतर जगहों पर नहीं किया जा रहा है। इसका भी ख्याल रखने की जरूरत है।
इस अवसर पर अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ अध्यक्ष संजय कुमार चौधरी, मंत्री के.के. सिंह, पेंशन सेल सदस्य रविन्द्र कुमार मिश्रा, मीडिया प्रभारी अनुप सिंह, सी.सी.एल. सी.के.एस. अध्यक्ष निर्गुण महतो भी मौजूद थे।
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