जमशेदपुर। टाटा स्टील 3 मार्च को अपने संस्थापक जमशेदजी नसरवानजी टाटा की 187वीं जयंती पर उस अमर और दूरदर्शी सोच को नमन करती है, जिसने एक सदी से भी अधिक समय से कंपनी को दिशा और उद्देश्य प्रदान किया है। जमशेदजी नसरवानजी टाटा केवल एक अग्रणी उद्योगपति नहीं थे, बल्कि वे एक सच्चे राष्ट्रनिर्माता थे।
जब भारत में औद्योगिक आधारभूत संरचना लगभग ना के बराबर थी, तब उन्होंने इस्पात की शक्ति से आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न देखा। उनका मानना था कि उद्योग का अंतिम उद्देश्य समाज की सेवा होना चाहिए। यही विचारधारा आगे चलकर ईमानदारी, उत्कृष्टता और सामुदायिक विकास पर आधारित एक मजबूत औद्योगिक संस्कृति की नींव बनी।
टाटा स्टील की स्थापना और जमशेदपुर शहर का निर्माण, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित औद्योगिकीकरण का एक प्रगतिशील उदाहरण बना-ऐसा मॉडल, जो वैश्विक मानक बनने से बहुत पहले ही समाज और उद्योग के संतुलित विकास की मिसाल स्थापित कर चुका था।
आज भी वही दूरदर्शी सोच टाटा स्टील की रणनीति और कार्यों का मार्गदर्शन करती है। भारत, यूरोप और अन्य देशों में अपने संचालन के साथ, टाटा स्टील एक मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंपनी के निर्माण की दिशा में कार्यरत है, जिसका विकास स्पष्ट उद्देश्य और मूल्यों से प्रेरित है।
भू-राजनीति, प्रौद्योगिकी और सतत विकास के कारण तेजी से बदलती दुनिया में, कंपनी अपनी बुनियाद को और सुदृढ़ कर रही है तथा भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए स्वयं को तैयार कर रही है। भारत में, टाटा स्टील देश की बुनियादी अवसंरचना और विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप अपनी क्षमता विस्तार योजनाओं को आगे बढ़ा रही है।
कंपनी की योजना एनआईएनएल की क्षमता को 1 से बढ़ाकर 9.5 मिलियन टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) करने की है, और इसके पहले चरण के तहत क्षमता को 4.8 एमटीपीए तक बढ़ाने के लिए बोर्ड की स्वीकृति प्राप्त कर ली गई है।
भारत में स्क्रैप आधारित इस्पात निर्माण की दिशा में अपना पहला कदम बढ़ाते हुए, कंपनी शीघ्र ही लुधियाना, पंजाब में अपने ईएएफ आधारित इस्पात निर्माण संयंत्र का शुभारंभ करने जा रही है।
यूरोप में, टाटा स्टील अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने और डीकार्बोनाइजेशन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए संरचनात्मक परिवर्तन को आगे बढ़ा रही है। सितंबर 2024 में पोर्ट टेलबॉट स्थित ब्लास्ट फर्नेस के बंद होने के बाद, कंपनी की ईएएफ आधारित इकाई निर्धारित योजना के अनुसार प्रगति कर रही है।
वर्ष 2025 में, विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, नीदरलैंड्स की सरकार और टाटा स्टील ने कम-उत्सर्जन इस्पात उत्पादन की ओर रूपांतरण के पहले चरण के लिए एक गैर-बाध्यकारी संयुक्त आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए। यह पहल यूरोप में हरित और सस्टेनेबल स्टील मेकिंग की दिशा में कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
ग्रीन स्टील निर्माण की दिशा में बदलाव कंपनी के इतिहास के सबसे बड़े परिवर्तनों में से एक है। टाटा स्टील प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखते हुए और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान केंद्रित करते हुए न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन उपायों, सर्कुलर प्रक्रियाओं तथा ऊर्जा दक्षता में निवेश कर रही है।
टाटा स्टील द्वारा हिसारना और ईजीमेल्ट जैसी तकनीकों में निवेश और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के बीच सहयोग के माध्यम से प्रदर्शन में सुधार, ऐसे ही अनेक महत्वपूर्ण कदमों में शामिल हैं। सभी परिचालनों में सुरक्षा, परिचालन उत्कृष्टता, वित्तीय अनुशासन और जिम्मेदारपूर्ण गवर्नेंस अडिग प्राथमिकताएं बनी हुई हैं। ये प्रयास पीढ़ीगत सोच को दर्शाते हैं, जो संस्थापक के उस विश्वास को प्रतिबिंबित करते हैं कि स्थायी और मजबूत संस्थानों का निर्माण ही सच्ची प्रगति का आधार है।
इस वर्ष टाटा स्टील “वन विज़न. वन टाटा स्टील” थीम के साथ संस्थापक दिवस मना रही है, जो एक वैश्विक संगठन के रूप में एकजुट होकर कार्य करने के नए संकल्प को रेखांकित करती है। एक एकीकृत संगठन का अर्थ यह भी है कि कार्यस्थल पर विविध विचारों को सम्मानपूर्वक सुना जाए।
कंपनी विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के बीच तकनीक, सततता और नवाचार की शक्तियों को साझा करने के लिए सहयोग को मजबूत कर रही है। साथ ही, वह भविष्य की कार्यबल के लिए अनुकूल और प्रेरक वातावरण तैयार कर तालमेल को बढ़ावा दे रही है तथा प्रदर्शन को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की दिशा में प्रयासरत है।
टाटा स्टील का विविधता और समावेशन के प्रति अग्रणी और प्रतिबद्ध दृष्टिकोण उद्योग की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ते हुए नए मानक स्थापित कर रहा है। इस सोच ने कई ऐतिहासिक पहलों को जन्म दिया है।नोआमुंडी की आयरन ओर माइन में दुनिया की पहली ऑल वूमेन माइनिंग शिफ्ट की शुरुआत केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की सशक्त मिसाल है। इसी तरह, कलिंगानगर में आउटबाउंड लॉजिस्टिक्स के तीनों शिफ्टों में महिला कर्मचारियों की तैनाती ने औद्योगिक कार्यसंस्कृति को एक नई दिशा दी है।
वित्त वर्ष 2025 में भारत में 20% विविध कार्यबल का लक्ष्य प्राप्त कर कंपनी ने समावेशी विकास की अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत आधार दिया है। अब लक्ष्य है कि इसी मॉडल को वैश्विक परिचालनों में भी लागू कर एक ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित की जाए, जहाँ अवसर, सम्मान और नेतृत्व में समान भागीदारी सुनिश्चित हो।
संस्थापक दिवस के अवसर पर, टाटा स्टील एक बार फिर अपने मूल सिद्धांतों, साझा मूल्यों और उद्देश्यपूर्ण विकास के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराती है। आगे की दिशा स्पष्ट है—एक अधिक सशक्त, एजाइल और भविष्य के लिए तैयार टाटा स्टील का निर्माण करना। यह संकल्प संस्थापक जमशेदजी टाटा के दूरदर्शी विज़न से प्रेरित है और पूरे संगठन में टीमवर्क की सामूहिक ऊर्जा से संचालित है।
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