रांची। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने जनजातीय उप योजना के अंतर्गत 17 और 18 फरवरी को मशरूम उत्पादन में उद्यमिता विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। आईसीएआर की संस्था नेशनल ब्यूरो ऑफ़ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेस (एनबीपीजीआर), नई दिल्ली के सहयोग से यह आयोजित किया गया।
इसका उद्घाटन करते हुए बीएयू के कुलपति डॉ एससी दुबे ने कहा कि झारखंड की भौगोलिक परिस्थितियां मशरूम उत्पादन के लिए काफी अनुकूल हैं। बहुत कम खर्च में घरेलू स्तर पर भी इसका उत्पादन किया जा सकता है। बाजार की भी कमी नहीं है। इसलिए प्रशिक्षणार्थियों को मशरूम उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाने का प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा समर्थित पांचों किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के 50 किसानों ने भाग लिया। साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा अंगीकृत गांव-सिलागाई, जारी, करौंदा, कमाती के भी करीब 50 किसान प्रतिभागी थे।
विषय प्रवेश करते हुए एनबीपीजीआर के नोडल पदाधिकारी डॉ जमील अख्तर ने कहा कि उद्यमिता विकास के लिए संस्थान द्वारा इस प्रकार के आयोजन देश के विभिन्न राज्यों में किए जाते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की की प्रशिक्षण के उपरांत किसान भाई-बहन मशरूम उत्पादन का कार्य प्रारंभ करेंगे।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि संकाय के डीन डॉ डीके शाही उपस्थित थे। स्वागत भाषण डॉ बीकके झा, धन्यवाद ज्ञापन डॉ एचसी लाल और संचालन शशि सिंह ने किया।
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