रांची। 10 साल बाद रमा खलखो नगर निगम के चुनावी मैदान में उतरीं हैं। कांग्रेस समर्थित मेयर पद की उम्मीदवार बनाई गईं पूर्व मेयर रमा खलखो ने अपने पुराने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए जनता से एक बार फिर समर्थन मांगा है।
उन्होंने कहा कि 2008 में हुए नगर निगम चुनाव के बाद पांच साल के कार्यकाल में उनकी टीम ने जमीन पर दिखने वाले कई बड़े काम किए थे, जिन्हें रांची की जनता आज भी याद करती है।
कांग्रेस को टक्कर देने के लिए भाजपा ने पूर्व वार्ड पार्षद रोशनी खलखो को समर्थन दिया है और रोशनी और रमा में इस पद के लिए कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है। रोशनी खलखो भी एक प्रखर नेता हैं और उन्होंने कई बार जनता की आवाज उठाई है।
नॉमिनेशन के वक्त रमा खलखो ने कहा कि उनके कार्यकाल में सिर्फ डोर-टू-डोर कचरा उठाने की व्यवस्था ही नहीं की गई, बल्कि महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वर्ण जयंती रोजगार योजना के तहत ऋण उपलब्ध कराया गया।
इसके साथ ही गरीबों के लिए वाल्मीकि आवास योजना और बेसिक सर्विस फॉर अर्बन पुअर योजना के तहत आवास मुहैया कराए गए।
फुटपाथ दुकानदारों को भी व्यवस्थित तरीके से रोजगार करने के लिए स्थान दिया गया, ताकि वे सम्मान के साथ अपनी आजीविका चला सकें।
राजधानी में अतिक्रमण को लेकर पूछे गये सवाल पर रमा खलखो ने कहा कि यह एक गंभीर और संवेदनशील समस्या है। उन्होंने बताया कि पहले भी वर्षों से रह रहे लोगों को उजाड़ने के बजाय उन्हें बसाने का काम किया गया था, जिसका उदाहरण मधुकम और रुगड़ी में बने आवास हैं।
उन्होंने चिंता जताई कि खादगड़ा बस स्टैंड के पीछे वर्षों से बसी बस्ती को हाल ही में उजाड़ दिया गया, जबकि पिछले दो साल से नगर निगम परिषद (हाउस) नहीं होने के कारण सभी फैसले अफसरों द्वारा लिए जा रहे थे।
उन्होंने कहा कि हाउस बनने के बाद ऐसे मामलों में यह तय किया जाएगा कि विस्थापित लोगों को कहां और कैसे बसाया जाए।
बरसात के दौरान जलजमाव की समस्या पर रमा खलखो ने दावा किया कि उनके कार्यकाल के बाद इस्लाम नगर और रातू रोड के नागा बाबा क्षेत्र जैसे इलाकों में जलभराव की समस्या पर काफी हद तक काबू पा लिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में नगर निगम में आपसी खींचतान के कारण विकास कार्य प्रभावित हुए और दो साल से मेयर की सीट खाली रहने से शहर को नुकसान हुआ। रमा खलखो ने कहा कि अगर जनता उन्हें फिर से मौका देती है, तो उनके पास रांची के विकास के लिए एक स्पष्ट और व्यापक विजन है, जिसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाएगा।
चुनावी मुकाबले पर उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला जनता के हाथ में है और वही तय करेगी कि शहर की बागडोर किसे सौंपनी है। रमा खलखो पहले भी इस पद पर रह चुकी हैं और करीब दस साल बाद फिर चुनावी मैदान में उतरी हैं।
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