विकसित भारत मातृशक्ति के प्रयास के बिना संभव नहीं: डॉक्टर पूजा
झारखंड के विविध क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाली मातृशक्तियों को किया गया सम्मानित
रांची। सप्तशक्ति संगम के समापन समारोह में राष्ट्र सेविका समिति की सह कार्यवाहिका सुनीता हल्देकर ने मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने समस्त विश्व को मानवता का विचार दिया है। सप्तशक्ति संगम संघ शताब्दी वर्ष पर राष्ट्र मातृशक्ति सम्मेलन रूपी यज्ञ संपन्न कर रहा है। समाज में स्त्री की भूमिका क्या है, यह माता एवं बहन बेटियों को पता रहना चाहिए। माताएं ही शिवाजी को छत्रपति बनातीं हैं।बालक नरेंद्र, विवेकानंद बनता है। युवा ईश्वरचंद्र विद्यासागर बनता है। राष्ट्र के भविष्य के पीछे मातृशक्ति की ममता एवं साधना होती है। भारत एक देश नहीं विचार है, एक चेतन है। समाज को धारण करने वाली माता एक शक्ति है। स्त्री राष्ट्र की आत्मा और ऐश्वर्य है।
समारोह की अध्यक्षता कर रही पद्मश्री चामी मुर्मू जिन्होंने अभी तक 25 लाख पौधे लगाए हैं, उन्होंने कहा पर्यावरण की रक्षा करना मातृशक्ति की महती जिम्मेवारी है। पर्यावरण की रक्षा के लिए पेड़ पौधों को हरा भरा रखना एवं पौधारोपण आवश्यक है। जंगल की रक्षा करना हमारा परम धर्म है। हमें जंगल से बहुत लाभ प्राप्त होता है। स्त्रियों को स्वयं सहायता समूह बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।
सप्तशक्ति संगम की क्षेत्र संयोजिका तथा समारोह की मुख्य वक्ता डॉ पूजा ने 350 मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना मातृशक्ति के बिना संभव नहीं है। मातृशक्ति सप्तशतियों के साथ जन्म लें तथा माताएं अपने बच्चों को दिशा निर्देशन अवश्य प्रदान करें। बच्चे हमारी पूंजी हैं। हमें जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तन लाकर अपने राष्ट्र को महान बनाना है। हमारे बच्चे मोबाइल फोन से चिपके नहीं रहें। सद्साहित्य का अध्ययन भी करें। राष्ट्र की संस्कृति को पहचानते हुए हमें अपने राष्ट्र पर गर्व करना चाहिए। शास्त्र और शास्त्र के शिक्षा हमें अपने समाज के अंदर ही मिलती है। माताएं रानी दुर्गावती से शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं। नारी के रूप में हमें अपने आप पर विश्वास करना पड़ेगा। हमारा राष्ट्र तब मजबूत होगा, जब हम अपने ‘स्व’ को नहीं भूलेंगे। उन्होंने आगे कहा कि समाज में विकृतियों को मिटाने का कार्य केवल माताएं ही कर सकती हैं। पश्चात सभ्यता के नकल से हमारे देश का कल्याण नहीं होगा।
इस अवसर पर झारखंड के विविध क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाली मातृशक्ति को सम्मानित किया गया, जिसमें पद्मश्री जमुना टुडू, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित श्रीमती दीक्षा, अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज रंजन सिंह ,पद्मश्री छुटनी महतो, अधिवक्ता रिमी रानी, आशा लिंडा, डॉक्टर मंजू मिंज, त्रिपुला दास तथा मृदुल प्रमुख थीं।
कार्यक्रम में अतिथियों का परिचय श्रीमती सुशीला ने कराया। कार्यक्रम के प्रारंभ में श्रीमती रंजना द्वारा संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने एवं सप्तशती संगम समारोह के संपन्न कार्यक्रमों का वृत्त पीपीटी के माध्यम से रखा। श्रीमती किरण ने सप्तशती संगम के सक्सेस स्टोरी को मातृशक्ति के समक्ष रखा, साथ ही साथ मंच का संचालन भी किया।

इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए विद्या विकास समिति के संवाददाता एवं संपादक मनोज कुमार ने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्या विकास समिति, झारखंड के प्रदेश सचिव नकुल कुमार शर्मा, प्रांत के सप्तशक्ति कार्यक्रम के संरक्षक अखिलेश कुमार, नीरज कुमार लाल, विद्या विकास समिति के समस्त पूर्णकालिक एवं प्रवासी कार्यकर्ता तथा कार्यालय कार्यकर्ता के साथ-साथ सरला बिरला विश्वविद्यालय के भी कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा। आभार ज्ञापन श्रीमती कविता द्वारा किया गया। वंदे मातरम के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई।
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