विदेशी भाषा शिक्षा पर पुनर्विचार कर रहा है बीआईटी मेसरा

झारखंड
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रांची। बीआईटी, मेसरा के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के तत्‍वावधान में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हो गया। हाइब्रिड मोड में आयोजित यह सम्मेलन “विदेशी भाषा शिक्षण एवं अधिगम में प्रौद्योगिकी, नैतिकता और सांस्कृतिक आयाम” विषय पर केंद्रित था।

इसमें देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं शिक्षकों ने भाग लिया। प्रौद्योगिकी-आधारित और सांस्कृतिक रूप से परस्पर जुड़े विश्व में भाषा शिक्षा की बदलती भूमिका पर विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन के दौरान भाषा, प्रौद्योगिकी, नैतिकता और संस्कृति से जुड़े अनेक अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। इनमें डॉ. कुमारी मानसी का मुख्य व्याख्यान “अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कूटनीति के रूप में भाषा: बहुभाषिकता की रणनीतिक भूमिका” विषय पर विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।

इसके बाद शोध पत्र प्रस्तुतिकरण सत्र आयोजित किए गए, जिनकी अध्यक्षता पहले डॉ. कुमारी मानसी एवं डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने की। बाद में डॉ. ज्योति शर्मा और डॉ. संदीप कुमार बिस्वास ने सत्रों का संचालन किया।

अकादमिक गतिविधियों के क्रम में प्रो. अविजित बेनर्जी ने बहुसांस्कृतिक कक्षाओं में एआई-समेकित शिक्षण पद्धतियों और सांस्कृतिक पहचान पर व्याख्यान दिया। वहीं डॉ. रोडिना ओल्गा ने “संस्कृति, मूल्य, नैतिकता और आधुनिक प्रौद्योगिकी के संरक्षक के रूप में रूसी भाषा और संस्कृत” विषय पर एक विषयगत संबोधन प्रस्तुत किया।

प्रौद्योगिकी-समर्थित भाषा शिक्षण में नैतिक दायित्व और सांस्कृतिक संवेदनशीलता पर अपने विचार डॉ. ज्योति शर्मा ने रखे। सम्मेलन की चर्चाओं का समापन अंतिम शोध पत्र प्रस्तुतिकरण सत्र के साथ हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. ज्योति शर्मा और डॉ. अभय रंजन ने की।

इस सम्मेलन को नई दिल्ली स्थित चीन जनवादी गणराज्य के दूतावास का अकादमिक समर्थन प्राप्त हुआ। अंतिम दिवस पर “विदेशी भाषा शिक्षा का भविष्य: नीति और शोध की दिशाएं” विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसका संचालन बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. भास्कर कर्ण ने किया।

इस पैनल में डॉ. सुशांत कुमार मिश्रा, डॉ. ज्योति शर्मा और डॉ. कुमारी मानसी ने अपने विचार प्रस्तुत किए। समापन (वैलेडिक्टरी) सत्र में डॉ. देवेंद्र कुमार सिंह, फ्रेंच अध्ययन विभाग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने डिजिटल परिवर्तन, प्रौद्योगिकी के नैतिक उपयोग, बहु-माध्यमीय साक्षरता और वैश्विक संप्रेषण जैसे प्रमुख विषयों पर प्रकाश डाला।

सम्मेलन का समापन आयोजन सचिव डॉ. धर्मेंद्र कुमार चंद द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद के साथ हुआ। उन्होंने वक्ताओं, सत्र अध्यक्षों, शोधार्थियों, प्रतिभागियों और आयोजन समिति के सभी सदस्यों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।

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