यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, जानें मामले पर न्यायालय ने क्या कहा

नई दिल्ली देश
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नई दिल्ली। बड़ी खबर आई है, उच्च शिक्षा संस्थानों को लेकर जारी यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ अंततः सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हो गई।

याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई का आश्वासन दिया। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमें पता है कि क्या हो रहा है। सुनिश्चित करें कि याचिका की सभी कमियां दूर हो जाएं।

उन्होंने कहा कि हम इसे सूचीबद्ध करेंगे। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वो यूजीसी रेगुलेशन 2026 के रेगुलेशन 3(c) को लागू करने पर रोक लगाए।

2026 के नियमों के अंतर्गत बनाई गई व्यवस्था सभी जाति के व्यक्तियों के लिए लागू हो। याचिककर्ता के वकील ने आज यानी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की।

याचिकाकर्ता ने कहा कि सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव की संभावना है। याचिका में कहा गया है कि ये नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण है। उनके मौलिक अधिकारों का हनन करने वाले हैं।

इस बीच हाल में ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का भी एक बयान सामने आया था। उन्होंने कहा था, “मैं अत्यंत विनम्रतापूर्वक यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यूजीसी के नए नियमों से किसी के साथ भेदभाव या उत्पीड़न नहीं होगा।

कानून का दुरुपयोग किसी के द्वारा नहीं किया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा, ‘चाहे वह यूजीसी हो, केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, इसका दुरुपयोग न होने देना हमारी जिम्मेदारी होगी।”

बताते चलें कि यूजीसी द्वारा ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम, 2026’ नियम को 13 जनवरी को अधिसूचित किया गया था, जो 15 जनवरी से लागू हुए।

हायर एजूकेशन में जातिगत भेदभाव को जड़ से खत्म करने के नाम पर लाए गए नियम का विरोध पूरे देश में हो रहा है। हालांकि यूजीसी ने कहा है कि ये नियम 2012 के पुराने एंटी-डिस्क्रिमिनेशन फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए लाए गए हैं।

जानें विवाद की जड़ में है क्या

हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में Equity Committee, Equity Squad और Equal Opportunity Cell (EOC) बनाना अनिवार्य।
SC, ST और OBC छात्रों-कर्मचारियों के खिलाफ जातिगत भेदभाव की शिकायतों पर तुरंत जांच।
24×7 हेल्पलाइन, नियमित मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग।
भेदभाव साबित होने पर संस्थान की फंडिंग रोकी जा सकती है, डिग्री/कोर्स पर रोक या UGC मान्यता रद्द हो सकती है।
भेदभाव की परिभाषा को विस्तार दिया गया, जिसमें OBC को स्पष्ट शामिल किया गया।

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