बीएयू कर्मचारियों को ACP–MACP देने को लेकर निदेशक ने कृषि सचिव को लिखा पत्र, द‍िया ये तर्क

झारखंड
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रांची। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के अशैक्षणिक कर्मचारियों को ACP–MACP का लाभ देने को लेकर निदेशक ने कृ‍षि सचिव को 22 दिसंबर, 2025 को पत्र लिखा है। इसमें उन्‍होंने झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश का हवाला दिया है। उसकी मंजूरी देने की मांग की है।

बीएयू के कर्मचारियों ने इस मामले को लेकर न्यायालय का रूख किया था। कोर्ट ने एसीपी/एमएसीपी देने का आदेश दिया था। पूर्व आदेशों के अनुपालन में देरी को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के विरुद्ध अवमानना नोटिस जारी किया है।

एसीपी/एमएसीपी देने को लेकर बीएयू ने कृषि विभाग को पहले भी पत्र लिखा था। इसके आलोक में विभाग ने अपने पत्र (पत्रांक 380, दिनांक 18.02.2025)  द्वारा विश्वविद्यालय को अवगत कराया था कि इस मामले में वित्त विभाग से परामर्श प्राप्त किया गया।

वित्त विभाग ने कहा है कि बिरसा कृषि विश्वविद्यालय एक स्वायत सेवी संस्थान है। एसीपी/एमएसीपी के सकल्प के अनुसार स्वायत संस्थान उसकी परिधि में नहीं आते है। यदि संस्थान अपने संसाधन से व्ययभार वहन करता है तो सहमति दिये जाने पर विचार किया जा सकता है। चूंकि विश्वविद्यालय ने व्ययभार वहन करने में असमर्थता जतायी है। अतः प्रस्ताव को अस्वीकृत किया जाता है।

बीएयू के निदेशक ने कृषि सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि बिरसा कृषि विश्वविद्यालय झारखंड का एकमात्र कृषि तकनीकी विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय का कार्यक्षेत्र/फैलाव सम्पूर्ण झारखंड प्रदेश में है। इसके अधीन कार्यरत शिक्षकों/वैज्ञानिकों कर्मचारियों/ पदाधिकारियों के वेतनादि एवं सेवानिवृत्त कर्मियो की पेशनादि का भुगतान / वित्तीय भारी का वहन झारखंड सराकर द्वारा कालातर से किया जाता रहा है।

निदेशक ने लिखा है कि महालेखाकर, झारखंड ने भी अंकेक्षण प्रतिवेदन में विश्वविद्यालय कर्मियों को एसीपी/एमएसीपी योजना से आच्छादित करने का परामर्श प्रदान किया है। यह भी स्पष्ट किया है कि एसीपी/एमएसीपी वेतन का एक अंश भाग है। इससे पूर्व भी प्रशासी विभाग द्वारा विश्वविद्यालय कर्मियों को एसीपी योजना का लाभ प्रदान किया गया था।

निदेशक ने लिखा है कि ज्ञात है कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों/ वैज्ञानिकों को प्रदत्ता जीवित्तोकर्ष योजना के अधीन वित्तीय उन्नयन/प्रोन्नति‍ के लाभों से आच्छादन प्रशासी विभाग के अनुमोदन के बाद किया जाता है। साथ ही, सरकार स्तर पर सभी प्रकार की प्रभावी सुविधाओं से विश्वविद्यालय समय-समय पर प्रशासी विभाग के अनुदेशों के अनुरूप आच्छादित होती रहती है।

निदेशक ने लिखा है कि विषय की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए और झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा अवमाननावाद में पारित न्यायादेश के आलोक में बीएयू के शिक्षकेतर कर्मियों और पेंशनभोगियों/पारिवारिक पेंशनभोगियों को एसीपी/एमएसीपी योजनाओं के लाभों से आच्छादित करने संबंधी प्रस्ताव पर कृपया प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने की कृपा की जाय, जिससे न्यायालय के द्वारा प्रदत आदेश का ससमय अनुपालन किया जा सके।

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