पिठोरिया। खोरठा भाषा के महान कवि श्रीनिवास पानुरी की 105वीं जयंती के अवसर पर खोरठा दिवस सह सम्मान समारोह का आयोजन 25 दिसंबर को कांके स्थित विश्वा ट्रेनिंग सेंटर में किया गया। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन खोरठा साहित्य-संस्कृति परिषद एवं रांची विश्वविद्यालय के खोरठा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
समारोह के मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के मंत्री योगेन्द्र प्रसाद थे। विशिष्ट अतिथियों में झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी कपिल कुमार, महादेव महतो, वरिष्ठ अधिवक्ता रश्मि कात्यायन, सहित कई प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं संपादकगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत कवि श्रीनिवास पानुरी के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पण के साथ हुई। इस अवसर पर खोरठा भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वानों को विभिन्न सम्मानों से नवाजा गया।
श्रीनिवास पानुरी स्मृति साहित्य सम्मान – डॉ. बी.एन. ओहदार, खोरठा सेवा सम्मान – डॉ. कुमारी शशि, खोरठा कला-संस्कृति रत्न – राम किशुन सोनार, खोरठा करील-पोहा पुरस्कार – डॉ. संदीप कुमार महतो को दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान खोरठा साहित्य की सात पुस्तकों का विमोचन किया गया। लोकगीत-संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने समारोह को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया और श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
वक्ताओं ने एक स्वर में खोरठा भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई। इसे झारखंड की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए संरक्षण व संवर्धन पर बल दिया।
धन्यवाद परिषद के सचिव सुजीत कुमार ने किया। समारोह में मनोज कुमार गोप, बिनोद करमाली, नितीश चौधरी, सोनी कुमारी, मालती कुमारी, सरोज कुमारी, चन्दन कुमार सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी, छात्र-छात्राएं एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में डॉ. शशि कुमारी, डॉ. अर्चना कुमारी, डॉ. दिनेश कुमार दिनमनी सहित अन्य शोधार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। समारोह ने खोरठा भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया।
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