नई दिल्ली। बड़ी खबर ये आ रही है कि, हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड को लेकर भारत और कनाडा के बीच चल रहे तनाव के बीच कनाडा ने भारत से अपने 41 राजनयिकों को वापस बुला लिया।
ऐसे में भारत से कनाडा जाने के इच्छुक लोगों को आने वाले दिनों में वीजा संबंधी सेवाओं के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। चंडीगढ़, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों से कनाडा के लिए वीजा सेवाएं बंद हो गई हैं यानी अब इन शहरों से कनाडा जाने के लिए लोगों को दिल्ली आना होगा। इनमें सबसे बड़ा झटका पंजाबियों के लिए भी जो बच्चे या अभिभावक कनाडा जाने चाहते है, उन्हें भी दिल्ली जाकर वीजा प्रोसेसिंग करवानी होगी।
गुरुवार को कनाडा के विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कहा कि भारत में कनाडा के 62 राजनयिकों में से 41 को हटा दिया गया है। हालांकि, कनाडा के 21 राजनयिक भारत में ही रहेंगे। जॉली ने कहा कि यह फैसला उनकी राजनयिक छूट खोने के खतरे को देखते हुए लिया गया है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा भारतीय राजनयिकों को ऐसा करने के लिए धमकी नहीं देगा। जॉली ने कहा कि कर्मचारियों की कमी के कारण, कनाडा को नई दिल्ली को छोड़कर सभी कार्यालयों में व्यक्तिगत राजनयिक सेवाओं को निलंबित करना होगा।
वहीं, आव्रजन मंत्री मार्क मिलर ने संवाददाताओं से कहा कि वीजा आवेदन केंद्र सामान्य रूप से काम करेंगे, क्योंकि वे तीसरे पक्ष द्वारा चलाए जाते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि आवेदनों की प्रोसेसिंग में अब अतिरिक्त समय लगेगा।
उन्होंने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत के फैसले से दोनों देशों में नागरिकों की सेवाओं के स्तर पर असर पड़ेगा। दुर्भाग्य से, हमें चंडीगढ़, मुंबई और बेंगलुरु में अपने वाणिज्य दूतावासों में सभी व्यक्तिगत सेवाओं पर रोक लगानी होगी।”
उन्होंने कहा, “जिन कनाडाई लोगों को कांसुलर सहायता की आवश्यकता है, वे अभी भी दिल्ली में हमारे उच्चायोग का दौरा कर सकते हैं और आप अभी भी फोन और ईमेल के जरिए व्यक्तिगत रूप से ऐसा कर सकते हैं।”
आपको बता दें कि कनाडा के साथ जारी राजनयिक विवाद के बीच भारत ने ट्रूडो सरकार से नई दिल्ली में रह रहे अतिरिक्त राजनयिकों को वापस बुलाने का अल्टीमेटम दिया था। मोदी सरकार ने बीते सप्ताह तीन अक्टूबर को कहा था कि एक सप्ताह के भीतर ट्रूडो सरकार अपने अतिरिक्त डिप्लोमैट्स को भारत से वापस बुला ले। अगर 10 अक्टूबर के बाद भी ये राजनयिक भारत में ही रहते हैं, तो इनकी राजनयिक छूट खत्म कर दी जाएगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची बागची ने कहा, भारत का प्राथमिक ध्यान दो चीजों पर है; कनाडा में ऐसा माहौल होना, जहां भारतीय राजनयिक ठीक से काम कर सकें और कूटनीतिक ताकत के मामले में समानता हासिल कर सकें।
जानें पूरा विवाद
आपको बता दें कि 18 जून को कनाडा के सरी में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कर दी गई थी। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में खड़े होकर कहा कि हत्या के पीछे भारत का हाथ है। हालांकि, भारत ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे ‘बेतुका’ और ‘प्रेरित’ बताया है।
विशेष रूप से, कनाडा ने अभी तक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के दावे का समर्थन करने के लिए कोई सार्वजनिक सबूत उपलब्ध नहीं कराया है। बता दें कि निज्जर, जो भारत में एक नामित आतंकवादी था, उसे 18 जून को कनाडा के सरे, ब्रिटिश कोलंबिया में एक पार्किंग क्षेत्र में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मार दी गई थी। जिसके बाद दोनों देशों में तनाव जारी है।


