रांची। अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद के झाखंड प्रदेश का शिष्टमंडल राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से 12 जून को मिला। उन्हें साल भर से राज्य के 24 जिलों से प्राप्त हजारों मैथिल के सामूहिक हस्ताक्षर के साथ ज्ञापन सौपा।
वार्ता के क्रम में उन्हें बताया कि मैथिली अष्टम अनुसूची के साथ झारखंड की द्वितीय राजभाषा भी है। फिर भी नियोजन नीति में इसे शामिल नहीं किया गया है। इस भाषा को बोलने वालों की संख्या लाखों में है। ये सैकड़ों वर्षों से यहां रह रहे हैं। राज्यपाल ने कहा वे इस समस्या को समझकर इसपर पहल करेंगे।
शिष्टमंडल ने मिथिला की पारंपरिक प्रतीक पाग, दोपट्टा एवं पुष्पगुच्छ देकर राज्यपाल को सम्मानित किया गया। मिथिला के बारे में उन्होंने जानकारी ली।
शिष्टमंडल में परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अमरनाथ झा, महासचिव अजय झा, प्रदेश सचिव पंकज झा, कार्यसमिति के सदस्य यूके दास, किशोर झा मानवीय शामिल थे।
परिषद के सदस्यों ने बताया कि नियोजन नीति में मैथिली को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल नहीं करने पर संपूर्ण राज्य में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था। इसे आज राज्यपाल को समर्पित कर आंदोलन का प्रथम चरण पूरा किया गया।


