कार्तिक उरांव को भारत रत्‍न देने की मांग की आदिवासी विकास परिषद ने

झारखंड
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रांची। अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की रांची महानगर और रांची जिला के तत्वावधान में कार्तिक उरांव की जयंती 29 अक्‍टूबर को मनाई गई। झारखंड की राजधानी रांची में पिस्का मोड़ चौक पर कार्तिक उरांव का कटआउट लगाया गया। उसे फूल माला से सजाया गया। पूरी रीति रिवाज के साथ उनकी जयंती मनाई गई।

इस मौके पर परिषद के रांची महानगर अध्यक्ष पवन तिर्की ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव द्वारा आदिवासी के लिए काफी कार्य किए गए। अगर बाबा होते तो आज झारखंड का स्वरूप कुछ और होता। बाबा के सपनों को हम सभी को मिलकर पूरा करना है। बाबा का सपना जनजातीय लोगों के लिए झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, उड़ीसा के बॉर्डर पर एक शक्ति निकेतन विश्वविद्यालय खोलने का था।

परिषद के सदस्‍यों ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव एक अभियंता थे। बिरसा कृषि विश्‍वविद्यालय उनकी ही देन हैं। उनके नाम से कृषि अभियंत्रण विश्वविद्यालय की स्थापना किया जाए। भारत सरकार से डॉ उरांव को भारत रत्न देने की मांग भी की गई।

रांची जिला अध्यक्ष कुंदरसी मुंडा ने कहा कि बाबा द्वारा कई सराहनीय कार्य किये गये। आदिवासियों के लिए ट्राईबल सब प्लान कार्तिक उरांव द्वारा ही लाया गया, जिससे आदिवासी के विकास में किसी प्रकार का रोड़ा उत्‍पन्‍न नहीं हो। अगर बाबा आज होते तो झारखंड की अलग पहचान होती।

परिषद के सदस्‍यों ने कहा कि आज आदिवासी अपनी पहचान के लिए लड़ रहे हैं। उन्हें आदिवासी धर्म कोड नहीं मिला है, जिससे सरना आदिवासी की सही से जनगणना नहीं हो पा रही है। राज्य सरकार इस परिस्थिति को समझें। इसे झारखंड में लागू करें। आज के युवक से बाबा के पदचिह्न और मार्ग पर चलें।

कार्यक्रम में कुंदरसी मुंडा, पवन तिर्की, दुर्गा कच्छप, प्रकाश मुंडा, अमन मुंडा, अनुज हेंब्रोम, विष्णु उरांव, तेतरी उरांव, जेना उरांव, पंचू उरांव, रामु उरांव, सीता तिर्की, सूरज उरांव इत्यादि उपस्थित थे।