इस विधि से 1000 किसानों की वार्षिक आय 1 लाख से अधिक करना चाहता है TSF

झारखंड कृषि
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पूर्वी सिंहभूम। टाटा स्टील फाउंडेशन (TSF) एकीकृत खेती के माध्यम से 1000 किसानों को 1 लाख से अधिक की वार्षिक आय के साथ लाभांवित करना चाहता है। एकीकृत खेती पर अपने किसान आधार को गति देने के टाटा स्टील फाउंडेशन के प्रयास को स्थिर गति से सफलता मिल रही है।

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका ब्लॉक के अंतर्गत चकरी गांव में रहने वाले मुंडा जनजाति के किसान भरत सरदार एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिनकी खेती के तरीके अब लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। 5 एकड़ से अधिक जमीन के मालिक भरत ने हाल ही में अपने खेत में 100×100 फीट का तालाब बनाने के लिए सहमति दी है।

भरत कहते हैं, ‘मैं बहु-फसल और मत्स्य पालन कर पाऊंगा। इस विचार ने मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित किया।‘ एकीकृत खेती बहु-फसल की ऐसी विधि है, जिससे भूमि और मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व पर्यावरण पर उद्योग के नकारात्मक परिणामों को कम करते हुए अपनी पूरी क्षमता तक बढ़ जाते हैं।

यह खेती को अधिक कुशल बनाने और उर्वरकों एवं कीटनाशकों के उपयोग को कम करने में मदद करता है। एकीकृत खेती यह भी सुनिश्चित करती है कि यदि एक फसल खराब हो जाये, तो भी अन्य किस्में बची रहेंगी। किसान के लिए कुछ आय सुरक्षित करेंगी।

1.5 लाख रुपये से अधिक की अनुमानित वार्षिक आय के साथ भरत को लगता है कि फसलों, तकनीकों में विविधता लाने के साथ-साथ खेती के पारंपरिक और वैज्ञानिक साधनों को शामिल करने का विचार रंग ला रहा है। वह रोहू, कतला और मृगल जैसी देशी मीठे पानी की मछलियां पालते हैं। दूध के लिए गायों को पालते हैं। चावल, लौकी, करेला, पीली दाल और पपीता जैसी विभिन्न फसलों का प्रचार करते हैं।

भरत तीसरी पीढ़ी के किसान हैं। 2008 से खेती के श्री विधि को अपनाते आ रहे हैं। उनके तालाब का निर्माण 2021 में पूरा हुआ। तब से वह एकीकृत खेती का अभ्यास कर रहे हैं। अपने प्रशिक्षण के माध्यम से भरत ने खेत के कचरे जैसे गाय के गोबर का पुन: उपयोग करना और लागत को काफी कम करना सीखा है। गाय के गोबर का उपयोग ‘जीवामृत’ जैसे विशेष पाचक तत्व  के उत्पादन के लिए किया जा सकता है, जिसका उपयोग उसके तालाब में चारा के रूप में और उसके खेतों में उर्वरक के रूप में किया जा सकता है।

वह कहते हैं, ‘मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मैं जितना भी कमा सकता हूं, उससे मेरे बच्चों को अच्छी शिक्षा और स्वस्थ जीवन मिले। खेती के लिए कड़ी मेहनत, धैर्य और समर्पण की आवश्यकता होती है। परिणाम शानदार होते हैं।‘ भरत कहते हैं कि मेरे पास इसका और कोई तरीका नहीं है।

वह पूर्वी सिंहभूम जिले के उन कई सफल लोगों में से एक हैं, जिन्हें टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा की गयी एकीकृत कृषि पहल के तहत नए तालाबों के निर्माण और अपनी कृषि पद्धतियों में खेती के एकीकृत मॉडल को अपनाने से लाभ हुआ है।

आने वाले दिनों में, फाउंडेशन का यह प्रयास झारखंड और ओडिशा में अपने 1000 किसान आधार में से प्रत्येक के लिए 1 लाख वार्षिक आय सुनिश्चित करने के माध्यम से परिवर्तन और प्रगति का अनुकरणीय मॉडल बनाने की आकांक्षा रखता है।