नौकरी छोड़कर शुरू की फूलों की खेती, बनाई अलग पहचान

कृषि झारखंड
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  • पारंपरिक धान की खेती को छोड़कर अपनाया इसे
  • हर सप्ताह करीब 2000 फूलों का करते हैं उत्पादन

जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर जिले के मुसाबनी प्रखंड के प्रगतिशील किसान मधु हांसदा ने फूलों की खेती में अपनी अलग पहचान बनाई है। गोहला पंचायत अंतर्गत गोहला ग्राम के रहने वाले मधु ने स्नातक तक की पढ़ाई की है। पूर्व में रोजगार सेवक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वे बताते हैं रोजगार सेवक रहते हुए उन्होने समय निकालकर खेती-बाड़ी और बागवानी करना शुरू किया था। इसमें मन रमने के बाद उन्होने नौकरी छोड़ दी। अब पूरी तरह से संरक्षित फूलों की खेती पर अपना ध्यान केंद्रिउत कर लिया है। प्रगतिशील किसान मधु हांसदा फूलों की खेती के लिए प्रशिक्षण लिया है।

ड्रीप इरीगेशन विधि का करते हैं प्रयोग

मधु हांसदा कहते हैं कि जिला उद्यान पदाधिकारी मिथिलेश कालिंदी के निरंतर मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन से उन्हें संरक्षित फूलों की खेती में आगे बढ़ने के लिए काफी बल मिला। इससे पूर्व वे अपने खेतों में पारंपरिक विधि से धान की खेती किया करते थे, जिससे कुछ विशेष आय नहीं होती थी। इसके बाद उन्होने फूलों की खेती की तरफ रूख किया। जिला उद्यान विभाग की ओर से वर्ष 2019-20 में उन्होंने शेडनेट प्राप्त कर जरबेरा की फूलों की खेती शुरू की। इसके अलावा मेडिसिन एरोमैटिक एवं डेयरी टेक्नोलॉजी का भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे अपने खेतों में सिंचाई के लिए ड्रीप इरीगेशन विधि का प्रयोग कर जरबेरा फूल का उत्पादन करते हैं। मधु बताते हैं कि इस विधि से सिंचाई करने पर एक ओर जहां पानी की बचत होती, वहीं पौधों को भी पानी से प्राप्त होने वाले आवश्यक पोषण मिल जाता है।

हर सप्ताह लगभग 10 हजार की आमदनी

मधु हांसदा के शेडनेट से प्रति सप्ताह 2000 फूल का उत्पादन फिलहाल हो रहा है जिसे 4-5 रुपये प्रति फूल की दर से बाजार में बेचते हैं। मधु बताते हैं कि फूलों की खेती से लगभग 10,000 प्रति सप्ताह मुनाफा हो जाता है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में पूर्व की अपेक्षा बहुत सुधार हुआ है। मधु हांसदा ने जिले के किसानों से अपील करते हुए कहा कि पारंपरिक खेती के अतिरिक्त किसानों को खेती-किसानी से आय के दूसरे मार्गों को भी अपनाना चाहिए। इसमें फूलों की खेती भी एक उपयुक्त माध्यम है। उन्होने कहा कि जिला उद्यान पदाधिकारी द्वारा इस संबंध में समय-समय पर आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त होता है। आवश्कता है कि इच्छुक किसान आगे आकर फूलों की खेती तथा अन्य प्रगतिशील खेती कार्य को अपनायें।