मुख्य न्यायाधीश ने प्रेमाश्रय का किया निरीक्षण, जानी समस्‍याएं, खाना भी खाया

झारखंड
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रांची। मुख्य न्यायाधीश ने नाबालिग लड़कियों के गृह प्रेमाश्रय का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान की कार्यप्रणाली, रहने-खाने की व्यवस्था और बच्चों की भलाई से संबंधित सभी पहलुओं की समीक्षा की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने गृह में रह रही प्रत्येक बच्ची से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनकी समस्याएं और अनुभव सुने।

घर जाने की इच्छा

अधिकांश लड़कियों ने अपने घर वापस जाने की इच्छा व्यक्त जताई, परंतु प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण कई बच्चियां अब भी नहीं जा पा रही हैं।

कुछ की पहचान अस्पष्ट

कुछ लड़कियाँ अपने घर या परिजनों के बारे में स्पष्ट रूप से नहीं बता सकीं, जिससे परामर्श एवं परिवार-खोज प्रक्रिया को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता महसूस हुई।

सुविधाएं संतोषजनक

भोजन और अन्य मूलभूत सुविधाएं संतोषजनक पाई गईं। मुख्य न्यायाधीश ने बच्चियों के लिए तैयार भोजन का स्वाद भी लिया।

सुपरिटेंडेंट की सराहना

स्वच्छता, सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए गृह की सुपरिटेंडेंट की प्रशंसा की गई।

कठिनाइयों से अवगत कराया

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) सचिव ने मुख्य न्यायाधीश को विशेष आवश्यकता वाली बच्चियों के समुचित संस्थान में प्लेसमेंट में आने वाली कठिनाइयों से अवगत कराया, क्योंकि राजधानी में ऐसी किसी विशेष सुविधा की उपलब्धता नहीं है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने डालसा सचिव को इस संबंध में विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

दिए गए निर्देश

महिला अधिकारियों की टीम बनाएं

डालसा सचिव को निर्देश दिया गया कि वे महिला अधिकारियों की एक टीम गठित करें, जो प्रत्येक बच्ची से व्यक्तिगत रूप से वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे।

पुनर्वास में अनावश्‍यक विलंब नहीं करें

जिला बाल संरक्षण अधिकारी को निर्देशित किया गया कि वे बच्चों की पुनर्वास प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब नहीं करें। जिन मामलों में अभिभावक उपलब्ध नहीं हैं, वहां बच्चियों को समयबद्ध तरीके से फॉस्टर केयर या अन्य उपयुक्त विकल्प में भेजने की व्यवस्था करें।

प्रक्रिया सरल और शीघ्र होनी चाहिए

मुख्य न्यायाधीश ने प्रश्न किया कि जब बच्ची स्वयं घर जाना चाहती है और उसके माता-पिता उसे लेने के लिए तैयार हैं, तब फिर उसे जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया से क्यों गुजरना पड़े। इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि ऐसी स्थितियों में प्रक्रिया सरल और शीघ्र होनी चाहिए।

पुनः उनसे मिलने आने का आश्‍वासन

निरीक्षण के अंत में मुख्य न्यायाधीश ने बच्चियों को आश्वस्त किया कि वे शीघ्र ही पुनः उनसे मिलने आएंगे, जिससे बच्चियों में विश्वास और आत्मबल बढ़ा।

ये अधिकारी भी थे उपस्थित

निरीक्षण के दौरान उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, जुवेनाइल जस्टिस समिति, के सदस्य, निदेशक, सामाजिक सुरक्षा, डीसीपीओ, उच्च न्यायालय रजिस्ट्री के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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