सुजीत कुमार केशरी
पिठोरिया। हिंदी, क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषा-संस्कृति के संवर्धन और संरक्षण के लिए समर्पित संस्था ‘झारखंड साहित्य अकादमी स्थापना संघर्ष समिति’ ने वर्ष 2026 के अपने प्रतिष्ठित स्मृति सम्मानों की घोषणा कर दी है। समिति ने इस वर्ष का प्रतिष्ठित ‘पद्मश्री डॉक्टर गिरधारी रामगंज जो स्मृति सम्मान-2026’ प्रख्यात नागपुरी लेखिका, समीक्षक, उपन्यासकार डॉ. शकुंतला मिश्र को देने का निर्णय लिया है।
चयन एवं निर्णय
समिति की निर्णायक मंडली ने सर्वसम्मति से डॉ. मिश्र के नाम पर मुहर लगाई। निर्णायक मंडली में शिरोमणि महतो (अध्यक्ष), नीरज नीर (सचिव) और विनोद राज थे। समिति के अनुसार, डॉ. मिश्र ने साहित्य सृजन और अकादमिक गतिविधियों के माध्यम से नागपुरी भाषा को समृद्ध करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उनके दीर्घकालिक और महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए मार्च में आयोजित होने वाले एक भव्य समारोह में उन्हें इस सम्मान से नवाजा जाएगा।
कौन हैं डॉ. शकुंतला मिश्र
झारखंड के गुमला जिला अंतर्गत कदमटोली में जन्मी डॉ. शकुंतला मिश्र के पिता स्व. जोगेश्वर मिश्र एवं माता श्रीमती जगतारिणी मिश्र हैं। बचपन से ही साहित्यिक वातावरण में पली-बढ़ीं डॉ. मिश्र की मातृभाषा नागपुरी रही है, जिसके प्रति उनके मन में विशेष अनुराग रहा। उन्होंने ऐसे समय में नागपुरी भाषा को अपनी उच्च शिक्षा का माध्यम बनाया, जब इस भाषा में अध्ययन के अवसर सीमित थे। उन्होंने नागपुरी में स्नातकोत्तर (एम.ए.), एम.फिल, बी.एड और पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की है।
व्यावसायिक व साहित्यिक सफर
डॉ. मिश्र ने अपने करियर की शुरुआत एक विज्ञान शिक्षिका के रूप में की। तत्पश्चात उन्होंने लोहरदगा के बलदेव साहू महाविद्यालय में अध्यापन किया। इसके बाद वे आकाशवाणी, रांची में वरिष्ठ उद्घोषिका के पद पर रहीं, जहां उन्होंने नागपुरी और हिंदी भाषा के प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया। वर्तमान में वे ‘झारखंड झरोखा’ प्रकाशन की निदेशक हैं, जहां उनके निर्देशन में 400 से अधिक क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं की पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
डॉ. मिश्र नागपुरी भाषा परिषद की महासचिव नागपुरी साहित्य संस्कृति मंच की संस्थापक सचिव हैं। उन्होंने आकाशवाणी रांची में 31 वर्षों की लंबी अवधि तक नागपुरी एवं हिन्दी वरिष्ठ उद्घोषिका के रूप में सेवा दी है।
कृतियां और साहित्यिक अवदान
डॉ. मिश्र की अब तक 40 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें प्रमुख व्याकरण एवं शब्दकोश: नागपुरी सदानी व्याकरण, सदानी नागपुरी-हिन्दी शब्दकोश।
इतिहास एवं आलोचना: नागपुरी भाषा साहित्य का इतिहास, नागपुरी साहित्य दर्पण, नागपुरी कर आधुनिक साहित्यकार।
उपन्यास एवं कहानी: सातो नदी पार (उपन्यास), परदेशी बेटा (कहानी संग्रह)।
लोक संस्कृति: डगरमाटी (लोकगीत), अंगना (लोककथा संकलन), झारखंड की पारम्परिक कलाएँ।
सम्मान एवं पुरस्कार
साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें दो दर्जन से अधिक राष्ट्रीय एवं राजकीय सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें झारखंड रत्न (2018), झारखंड सरकार द्वारा कथा सम्मान (2008), प्रफुल्ल सम्मान (2022), अटल काव्य रत्न (2022), और पीटर शांति नवरंगी हीरानागपुर साहित्य सम्मान (2014) प्रमुख हैं।
साहित्य जगत में हर्ष
उनकी इस उपलब्धि पर पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख, महावीर नायक, डॉ. उमेश नंद तिवारी (अध्यक्ष, नागपुरी विभाग), डॉ. सुखदेव साहू, डॉ. संजय कुमार षाडंगी, डॉ. रामकुमार, डॉ. संतोष भगत, प्रसिद्ध कलाकार कृष्ण जीवन पौराणिक, धनेंद्र प्रवाही, अरविंद मिश्र, मांडर सम्राट मानपुरन नायक सहित शहर के अनेक बुद्धिजीवियों और शुभचिंतकों ने बधाई दी है।
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