- मोटर एक्सीडेंट क्लेम मामलों को लेकर कार्यशाला आयोजित
आनंद कुमार सोनी
लोहरदगा। झालसा के मार्गदर्शन में व्यवहार न्यायालय परिसर के सभाकक्ष में मोटर एक्सीडेंट क्लेम मामलों (एमएसीटी) को लेकर एक कार्यशाला का आयोजन 10 मार्च, 2026 को किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष झालसा, लोहरदगा राजकमल मिश्रा, डालसा सचिव राजेश कुमार, डीएसपी मुख्यालय समीर तिर्की, रिसोर्स पर्सन एवं ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के प्रबंधक शिव प्रकाश, रिसोर्स पर्सन जेपीएन सिन्हा और मध्यस्थ सह पैनल अधिवक्ता लाल धर्मेंद्र देव ने किया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजकमल मिश्रा ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान किए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों और प्रतिभागियों दुर्घटना पीड़ितों एवं उनके परिजनों को मुआवजे के प्रावधानों की जानकारी दें। यह भी सुनिश्चित करें कि दुर्घटना के बाद एफएआर (प्रथम दुर्घटना रिपोर्ट) समय पर तैयार कर संबंधित न्यायालय में जमा की जाए, ताकि पीड़ितों को शीघ्र मुआवजा मिल सके।
डीएसपी मुख्यालय समीर तिर्की ने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता सड़क दुर्घटनाओं को कम करना है। यदि दुर्घटना होती है तो निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए पीड़ितों को जल्द से जल्द मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन शिव प्रकाश ने बताया कि सभी वाहनों का बीमा होना आवश्यक है। कम से कम थर्ड पार्टी बीमा अवश्य कराया जाना चाहिए।
लगभग तीन हजार रुपये में चार पहिया और करीब 1300 रुपये में दो पहिया वाहन का बीमा कराया जा सकता है। दुर्घटना की स्थिति में बीमा कंपनी ही दूसरे पक्ष के प्रति वाहन मालिक की जवाबदेही वहन करती है।
रिसोर्स पर्सन जेपीएन सिन्हा ने बताया कि सड़क दुर्घटना के मामलों में मुआवजे की राशि पीड़ित की आयु, आय, आश्रितों की संख्या और वैवाहिक स्थिति जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की जाती है।
डालसा सचिव राजेश कुमार ने बताया कि एफएआर 48 घंटे के भीतर एमएसीटी कोर्ट में जमा किया जाना चाहिए। हिट एंड रन मामलों में मृतक के आश्रितों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है।
इसके लिए आवेदन एसडीओ कार्यालय में जमा करना होता है। ऐसे मामलों में अन्वेषण अधिकारी एसडीओ ही होते हैं।
डालसा सचिव ने बताया कि हिट एंड रन मामलों में अनुमंडल कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार 1 जनवरी से 31 दिसंबर, 2025 तक 17 मामले सामने आए। इनमें से आठ मामलों में आश्रितों के बीच 16 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है। नौ मामले अभी जीआईसी स्तर पर लंबित हैं।
कार्यशाला में एलएडीसीएस के अधिवक्ता, पैनल अधिवक्ता, विभिन्न थानों के पुलिस अधिकारी, पीएलवी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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