पशु विकृति की पहचान, आकलन में एक्यूरेसी और विश्वसनीयता बढ़ाएं : सचिव

झारखंड
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  • बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में पशुरोग वैज्ञानिकों का राष्ट्रीय सम्मेलन प्रारंभ

रांची। इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ वेटनरी पैथोलॉजिस्ट्स (आइएवीपी) का 42वां वार्षिक सम्मेलन गुरुवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के रांची वेटेरिनरी कॉलेज में शुरू हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीख पी थे।

सचिव ने पशु विकृति की पहचान, आकलन में एक्यूरेसी और विश्वसनीयता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने आयोजकों से आग्रह किया कि सम्मेलन की अनुशंसाएं राज्य सरकार को भी उपलब्ध कराएं, ताकि हर स्तर पर जागरुकता बढ़े। सरकार रोग नियंत्रण के लिए यथासंभव आवश्यक कदम उठा सके।

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एससी दुबे ने मानव, पशु और पर्यावरण के लिए एक स्वास्थ्य कार्यक्रम पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश में विशेषज्ञ पशु रोग वैज्ञानिकों की कमी के कारण रोगों का सही सर्वेक्षण एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। बढ़ते जूनोटिक रोगों से निपटने के लिए प्रयोगशाला सुविधाएं बढ़ानी होंगी।

कार्यक्रम की शुरुआत अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर के प्रोफेसर मनु मोहन सेबेस्टियन के ‘डिजिटल पैथोलॉजी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में शोध एवं निदान की प्रगति’ विषय पर एक घंटे की ऑनलाइन प्रस्तुति से हुई। उन्होंने डिजिटल पैथोलॉजी में शामिल चरणों और उपकरणों का विवरण देते हुए कहा कि यात्रा या शिपिंग के दौरान स्लाइड खोने का कोई खतरा नहीं रहता। यह क्लिनिकल ट्रायल में जटिल पैटर्न और संबंधों को एकीकृत करता है, लेकिन इसकी तकनीक की लागत बहुत अधिक है। भारत इस क्षेत्र में काफी पीछे है।

शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, जम्मू के कुलपति और आइएवीपी के अध्यक्ष डॉ. बी.एन. त्रिपाठी ने कहा कि शोध संस्थानों को इस विषय पर छोटे-छोटे प्रोजेक्ट तैयार करने चाहिए।

‘डॉ पीपी गुप्ता व्याख्यान’ के तहत ‘माइक्रोस्कोप से परे-पशु चिकित्सा पैथोलॉजी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ विषय पर बोलते हुए, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ जी साई कुमार ने पैथोलॉजी के ऐतिहासिक आधार और प्रगतियों का विवरण प्रस्तुत किया।

तमिलनाडु पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, चेन्नई के पूर्व कुलपति डॉ सी बालाचंद्रन और भारतीय वेटेरिनरी पैथोलॉजिस्ट कॉलेज के अध्यक्ष डॉ व्यास एम सिंगाटगेरी ने कीनोट व्याख्यान प्रस्तुत किया। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के पशुविकृति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ केके सिंह को विषय में उनके आजीवन योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में बीएयू के पशुचिकित्सा संकाय के डीन और आयोजन सचिव डॉ एमके गुप्त ने अतिथियों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ नंदनी कुमारी ने किया। देशभर से लगभग 300 पशु चिकित्सा वैज्ञानिक इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

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