CJP नेता आशुतोष रांका और सौरभ दास की रिहाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर

नई दिल्ली देश
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नई दिल्ली। कॉकट्रेच जनता पार्टी (CJP) ने बुधवार को अपने दो शीर्ष नेताओं आशुतोष रांका और सौरभ दास, की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। यह कदम स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा दोनों नेताओं की हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के ठीक एक दिन बाद उठाया गया है।

तत्काल सुनवाई की मांग

पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक बयान जारी कर कहा, “हमने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है और तत्काल रात में सुनवाई की मांग की है। सौरभ और आशुतोष को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। राजनीतिक बदले की भावना के लिए उनकी स्वतंत्रता की बलि नहीं दी जा सकती।” पार्टी ने यह भी कहा कि “देरी से मिला न्याय, न्याय न मिलने के बराबर है।”

क्या है पूरा मामला

CJP के इन दोनों नेताओं को 12 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उन्होंने जंतर-मंतर पर एक बंद गेट फांदकर तिरंगा लहराया था। उल्लेखनीय है कि जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में सार्वजनिक प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र रहा है, जिसे हाल ही में शहर के अधिकृत धरना स्थलों की सूची से हटा (डी-नोटिफाइड) दिया गया था।

किस मुद्दे पर था विरोध

CJP नेता मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे भी लगाए थे।

हिरासत में बढ़ोतरी

दोनों नेताओं को पहले पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जिसे बाद में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अदालत ने दो दिन और बढ़ा दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि उनका आचरण “कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं” दिखाता है। यह दर्शाता है कि वे “डी-नोटिफाइड क्षेत्रों में प्रदर्शन करने के आदी” हैं।

शांति भंग की आशंका

अदालत के आदेश में कहा गया कि जांच अधिकारी ने रिकॉर्ड पर पर्याप्त सबूत पेश किए हैं, जिससे शांति भंग होने और सार्वजनिक शांति में खलल पड़ने की आशंका जताई गई है। साथ ही, अदालत ने यह भी दर्ज किया कि दोनों नेताओं ने कथित तौर पर 11 अक्‍टूबर को दक्षिण-पश्चिम जिले के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किए गए “शांति बांड” का उल्लंघन किया है।

दिल्ली पुलिस का तर्क

दिल्ली पुलिस ने बार-बार कानून के उल्लंघन और यह आशंका जताते हुए कि उनकी रिहाई से और अधिक उल्लंघन और दूसरों को उकसावा मिल सकता है। उनकी हिरासत जारी रखने का समर्थन किया था।

जमानत मुचलके खारिज

स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने जांच के बाद दोनों नेताओं की ओर से दाखिल जमानतों को पहचान दस्तावेजों में विसंगतियों और उनके बारे में बुनियादी जानकारी देने में असमर्थता के चलते अयोग्य करार दे दिया था। उन्हें नए मुचलके दाखिल करने का निर्देश दिया था।

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