

पिठोरिया। राधा गोविन्द विश्वविद्यालय को लेकर विभिन्न सोशल मीडिया और मीडिया में खबरें प्रकाशित हुई है। इसपर खोरठा साहित्य संस्कृति परिषद के प्रभारी अनाम अजनबी ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान के संबंध में बात करते समय तथ्यों की निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों को सामने रखना आवश्यक है। कुछ आरोपों के आधार पर पूरे विश्वविद्यालय और हजारों विद्यार्थियों की मेहनत पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
श्री अजनबी ने कहा कि क्या राधा गोविन्द विश्वविद्यालय में पढ़ना कोई गुनाह है? क्या प्रतियोगिता परीक्षा में पास करना गुनाह है? गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए राजधानी रांची में रहकर पढ़ाई करना आसान नहीं है। ऐसे में रामगढ़ जैसे सुदूर इलाके में उच्च शिक्षा का अवसर उपलब्ध होना झारखंड के ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए बड़ी सुविधा है।

अनाम अजनबी ने कहा कि वर्ष 2018 से विद्यार्थी यहां अध्ययन कर रहे हैं। इतने वर्षों तक पढ़ाई करने के बाद विद्यार्थियों का रोजगार और प्लेसमेंट होना स्वाभाविक प्रक्रिया है। हर प्रतियोगिता परीक्षा में छात्र सफल होंगे। महिला पर्यवेक्षक की नियुक्ति में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का चयन हुआ है तो इसे संदेह की नजर से देखने के बजाय विद्यार्थियों की मेहनत और विश्वविद्यालय में हुई पढ़ाई के परिणाम के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रांची विश्वविद्यालय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के बाद राधा गोविन्द विश्वविद्यालय झारखंड के उन चुनिंदा विश्वविद्यालयों में है, जहां खोरठा की पढ़ाई हो रही है। खोरठा झारखंड की प्रमुख और व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषा है।

स्वाभाविक है कि जिस विश्वविद्यालय में विद्यार्थी वर्षों तक खोरठा का अध्ययन करेंगे, वे खोरठा विषय से संबंधित प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्तियों में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। बच्चों का चयन होना किसी घोटाले का प्रमाण नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और शिक्षा का परिणाम भी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में वास्तविक शिकायत या अनियमितता है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जांच से पहले ही पूरे विश्वविद्यालय, शिक्षकों और विद्यार्थियों को संदेह के घेरे में रखना उचित नहीं है।
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