बड़े बहुमत की ओर कदम बढ़ा रही है NDA, ये है पूरा समीकरण

नई दिल्ली देश राजनीति
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नई दिल्‍ली। महिला आरक्षण विधेयक, परिसीमन विधेयक और ‘एक देश, एक चुनाव’ को संसद से पास कराने के लिए NDA बड़े बहुमत की ओर कदम बढ़ा रही है। हाल ही में संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के गिरने के बाद सरकार ने विपक्ष के क्षेत्रीय दलों को साधने की रणनीति तेज कर दी है।

अब विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) के कुछ प्रमुख दलों के रुख में आए बदलाव के बाद सरकार दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के बेहद करीब पहुंचती दिख रही है। केंद्र सरकार लोकसभा में 2/3 बहुमत से मात्र 5 सीट दूर है।

संविधान संशोधन विधेयकों को पारित करने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत अनिवार्य होता है। लोकसभा में यह जादुई आंकड़ा 360 का है।

NDA के पास 318 सांसद हैं। इस आंकड़े को 360 तक पहुंचाने के लिए कुछ विपक्षी और क्षेत्रीय दलों का अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष समर्थन मिलने के संकेत हैं। इनमें DMK के 22 सांसद, NCP (शरद पवार गुट) के 8 सांसद, YSRCP के 4 सांसद हैं। सूत्रों के मुताबिक आरजेडी के 3 सांसद भी पाला बदल सकते हैं या वोटिंग के दौरान सरकार के रुख का समर्थन कर सकते हैं।

इस नए गठजोड़ से सरकार का आंकड़ा 355 तक पहुंच जाता है, जिसके बाद दो-तिहाई बहुमत (360) के लिए केवल 5 और सांसदों की जरूरत रह जाएगी। इसे निर्दलीय या अन्य छोटे दलों के सहयोग से आसानी से पूरा किया जा सकता है।

राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 वोटों की आवश्यकता है। वर्तमान में NDA के पास 152 सांसद हैं। यदि DMK, NCP (SP) और YSRCP जैसी पार्टियां परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को समर्थन देती हैं, तो राज्यसभा में एनडीए बेहद आसानी से 163 का आंकड़ा पार कर जाएगी।

यह राजनीतिक बदलाव अचानक नहीं हुआ है। कांग्रेस जहां इन विधेयकों को लेकर सरकार से सर्वदलीय बैठक की मांग पर अड़ी हुई थी, वहीं सपा और DMK जैसी पार्टियों ने गृह मंत्री अमित शाह से अलग से मुलाकात की है। DMK को सबसे बड़ा डर यह था कि जनसंख्या के आधार पर होने वाले परिसीमन से दक्षिण भारत की लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी। उत्तर भारत की सीटें बढ़ जाएंगी।

सरकार ने भरोसा दिया है कि नए परिसीमन (जो 2011 की जनगणना पर आधारित करने का प्रस्ताव है) में राज्यों की हिस्सेदारी का प्रतिशत प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। सीटें 50% तक बढ़ाई जा सकती हैं। लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 या 850 करने का प्रस्ताव है)।

महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पहले ही पास हो चुका है, लेकिन इसका जमीनी क्रियान्वयन परिसीमन के बाद ही संभव है। कोई भी क्षेत्रीय दल जनता के बीच ‘महिला विरोधी’ नहीं दिखना चाहता। इसलिए वे परिसीमन विधेयक को अटकाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्‍हें लग रहा है कि इसकी वजह से आने वाले राज्‍यों चुनाव में उनका नुकसान हो सकता है।

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