कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार ने ममता बनर्जी के एक और फैसले को बदल दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया।
यह योजना पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने 2012 में शुरू की थी। शुरुआत में केवल इमामों और मुअज्जिनों को मानदेय दिया जाता था। बाद में पुजारियों को भी इसमें शामिल किया गया। हाल ही में मार्च, 2026 में मानदेय बढ़ाया गया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार इमामों को ₹3000 प्रतिमाह, मुअज्जिनों और पुजारियों को ₹2000 प्रतिमाह दिए जा रहे थे।
नई सरकार ने कहा है कि “धर्म आधारित सरकारी सहायता” को समाप्त किया जा रहा है। अब योजनाएं धार्मिक पहचान के बजाय सामान्य सामाजिक कल्याण के आधार पर चलाई जाएंगी।
सरकार ने इसके साथ ही महिलाओं के लिए “अन्नपूर्णा योजना” की घोषणा की है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को ₹3000 प्रतिमाह सहायता दी जाएगी। राज्य परिवहन की बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की भी मंजूरी दी गई है।
भाजपा लंबे समय से इस मानदेय योजना को “तुष्टिकरण की राजनीति” बताकर विरोध करती रही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस का कहना था कि धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों को सहयोग देने से सामाजिक योजनाओं को लागू करने में मदद मिलती थी।
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