- न्यायालय ने माना कि पेसा के तहत ग्राम सभा को अधिकार
रांची। उच्चतम न्यायालय ने आदिवासी संस्कृति को बचाने के लिए जो निर्णय दिया है, यह स्वागतयोग्य निर्णय है। इस निर्णय में उच्चतम न्यायालय में उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा है। उक्त आदेश में कहा गया कि धर्म परिवर्तन के लिए यदि कोई गांव में आता है तो पेसा अधिनियम के अंतर्गत ग्राम सभा को अधिकार है कि उन्हें गांव में प्रवेश से रोका जाए। इस निर्णय के बाद धर्म परिवर्तन के धंधे पर रोक लगेगी। उक्त बातें पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहीं।
श्री दास ने कहा कि झारखंड के भी सभी मानकी, मुंडा, पडहा, परगनैत समेत सभी परंपरागत प्रधानों से अपील करता हूं कि वह भी पेसा अधिनियम के तहत अपनी ग्राम सभा से इस तरह का निर्णय पारित कराकर अपने गांव के बाहर बोर्ड लगाएं। आदिवासी संस्कृति और परंपरा को नष्ट करने वाले विदेशी धर्म के लोगों को अपने गांव में घुसने से रोके हैं। यदि हम आज नहीं जगे तो हमारा आनेवाला भविष्य, हमारा संस्कृति, हमारी परंपरा सब नष्ट हो जाएगा।
श्री दास ने कहा कि इस मामले में ध्यान देनेवाली बात है कि सरकार ने पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से इस प्रकरण में सशक्त पक्ष रखा। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि परंपराओं व सामाजिक संरचना के संरक्षण के लिए ग्राम सभाएं वैधानिक अधिकारों का प्रयोग कर सकती हैं। यह निर्णय आदिवासी स्वशासन की अवधारणा को सुदृढ़ करने वाला है। झारखंड सरकार भी इसे दृढ़ता पूर्वक लागू करे।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 28 अक्टूबर 2025 के फैसले को सही ठहराते हुए 16 फरवरी 2026 को एसएलपी खारिज कर दी।
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