गुजरात। हैरान कर देने वाली खबर गुजरात के सूरत जिले के मांडवी तालुका से आई है, जहां ताडकेश्वर गांव में ‘गायपगला समूह जलापूर्ति योजना’ के तहत बनाए गए एक ओवरहेड वाटर टैंक परीक्षण के दौरान ही ढह गया।
घटना के बाद राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार करीब 21 करोड़ रुपये की लागत से बना यह टैंक पूरी क्षमता से पानी भरे जाने के कुछ ही मिनटों में गिर पड़ा। हादसे में तीन महिलाएं, जिनमें एक नाबालिग बच्ची भी शामिल है, घायल हो गईं।
टैंक की संरचनात्मक मजबूती जांचने के लिए इसमें करीब नौ लाख लीटर पानी भरा गया था। दोपहर के आसपास अचानक पूरी संरचना भरभराकर गिर गई, जिससे आसपास के इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन गए।
तेज पानी के बहाव को देखकर लोग घरों से बाहर निकल आए। घायलों की पहचान कालिबेन ओछड़िया (20), अंगूरीबेन ओरड़ (37) और उनकी तीन वर्षीय बेटी अंजलि के रूप में हुई है, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यह 15 मीटर ऊंचा टैंक करीब तीन वर्षों में बनकर तैयार हुआ था और इसका उद्देश्य सूरत जिले के 33 से 35 गांवों को पीने का पानी उपलब्ध कराना था।
हालांकि उद्घाटन से पहले ही इसके ढह जाने से परियोजना को बड़ा झटका लगा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह हादसा टैंक के चालू हो जाने के बाद हुआ होता, तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।
घटना के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार ने सड़क एवं भवन विभाग और जल आपूर्ति से जुड़े कुल तीन इंजीनियरों को निलंबित किया गया है।
निलंबित अधिकारियों में अधीक्षण अभियंता अंकित गरासिया, कार्यकारी अभियंता रजनीकांत चौधरी और उप कार्यकारी/उप अभियंता जय चौधरी शामिल हैं।
इसके साथ ही निर्माण कार्य से जुड़ी निजी कंपनियों को किए जाने वाले सभी भुगतानों पर रोक लगा दी गई है।
बताया गया है कि निर्माण ठेकेदार मेहसाणा स्थित जयन्ती सुपर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और ठेकेदार बाबूभाई पटेल को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
इनके अलावा परियोजना प्रबंधन सलाहकार (पीएमसी) अहमदाबाद की मार्स प्लानिंग एंड इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को भी नोटिस जारी किया गया है।
पुलिस ने मांडवी थाने में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।तकनीकी जांच के लिए गुजरात इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट के इंजीनियरों और सूरत स्थित सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसरों की एक टीम मौके पर पहुंची।
टीम ने मलबे के नमूने इकट्ठा कर प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे हैं, ताकि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और टैंक के डिजाइन में खामियों की जांच की जा सके।
स्थानीय लोगों और विपक्ष ने निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है।
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