नई दिल्ली। मदरसा को लेकर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इनकार कर दिया। इसे खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता पर जुमाना भी लगाया।
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। इसमें मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक द्वारा संचालित शिक्षा संस्थानों को शिक्षा का अधिकार क़ानून के तहत लाने की मांग थी।
याचिकाकर्ता का कहना था कि मौजूदा व्यवस्था से मदरसों में आधुनिक और समग्र शिक्षा का अभाव है। उन्हें शिक्षा का अधिकार क़ानून के तहत शामिल करना ज़रूरी है, ताकि सभी बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिले।
याचिका में साल 2014 में संविधान पीठ के फैसले को चुनौती दी गई थी। उस फैसले में कहा गया था कि शिक्षा का अधिकार कानून अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू नहीं होगा।
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने याचिका पर सख्त नाराजगी जाहिर की। जस्टिस ने याचिकाकर्ता पर एक लाख का जुर्माना लगाया।
कोर्ट ने कहा कि एक रिट याचिका के ज़रिए कैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दे सकते है। न्यायापालिका को इस स्तर पर मत लाइये।
जस्टिस ने कहा कि हमे अब ऐसी याचिका दाखिल करने वाले वकीलों पर अब जुर्माना लगाना होगा।
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