खदान बंद करने और पुनर्उपयोग पर हुई राष्ट्रीय कार्यशाला

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  • खदानों को बंद करना खनन गतिविधि का अंत नहीं : रेड्डी

तमिलनाडु। कोयला मंत्रालय और एनएलसी इंडिया लिमिटेड के तत्वावधान में तमिलनाडु के नेवेली में ‘निष्कर्षण से आगे बढ़ना : खदान बंद करना और पुनर्उपयोग’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इस कार्यशाला का उद्घाटन किया।

मंत्री ने खदान बंद करने और सतत विकास योजना और खनन के बाद भूमि के सतत पुनर्उपयोग पर केंद्रित देश की पहली राष्ट्रीय स्तर की पहल के बारे में बताया। कोयला सचिव विक्रम देव दत्त, अपर सचिव श्रीमती रूपिंदर बराड़ और सनोज कुमार झा, कोयला नियंत्रक सजीश कुमार एन और कोयला मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी कार्यशाला में उपस्थित थे।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि खदानों को बंद करना खनन गतिविधि का अंत नहीं, बल्कि खनन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए नए सामाजिक-आर्थिक अवसरों की शुरुआत है। उन्होंने वैज्ञानिक पुनर्स्थापन, पर्यावरण बहाली, खदान बंद करने के लिए आवंटित धनराशि का प्रभावी उपयोग और खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

इस कार्यशाला में बंद किए जाने वाली खानों के 147 नोडल अधिकारियों के साथ-साथ कोयला क्षेत्र के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी खनन कंपनियों, नियामक निकायों, गैर सरकारी संगठनों, नीति निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, शिक्षाविदों, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यशाला के दौरान आयोजित नौ विषयगत सत्रों में सरकार, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों, विकास संगठनों और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के 29 प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया। इन विशेषज्ञों ने खदानों को बंद करने और खनन के बाद के बदलावों के बारे में अपने व्यावहारिक अनुभव और अंतर्दृष्टि साझा की।

इन सत्रों में खनन के बाद के विभिन्न विकल्पों पुनर्योजी कृषि, कृषि वानिकी, पशुपालन आधारित आजीविका, खनन क्षेत्रों में मत्स्य पालन, नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण, पर्यटन विकास, सांस्कृतिक उद्यम, कौशल विकास केंद्र, नीतिगत समन्वय, अंतरराष्ट्रीय वित्त तक पहुंच और संरचित खदान बंद करने में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएं आदि पर चर्चा की गई।

विचार-विमर्श में खनन के बाद के क्षेत्रों में विविध और टिकाऊ आजीविका के अवसर सृजित करने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में समावेशी और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने में सामुदायिक भागीदारी और आजीविका सृजन की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी बल दिया।

कार्यशाला में, प्रतिभागियों ने एनएलसी इंडिया लिमिटेड के पुनर्निर्मित और कोयला-मुक्त क्षेत्रों का भी दौरा किया, जहां खनन की गई भूमि को नौका विहार सुविधाओं, पुनर्जीवित जल निकायों और समृद्ध पक्षी आवासों वाले पर्यावरण-पर्यटन स्थलों में परिवर्तित कर दिया गया है।

इस भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों को यह जानने का अवसर मिला कि वैज्ञानिक पुनर्निर्माण और एकीकृत योजना विक्षुब्ध खनन क्षेत्रों को जैव विविधता से समृद्ध और आर्थिक रूप से उत्पादक भूदृश्यों में परिवर्तित कर सकती है।

कार्यशाला में बताया गया कि 25 खानों को वैज्ञानिक तरीके से सफलतापूर्वक बंद किया जाना एक राष्ट्रीय उपलब्धि है, जो देश में व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेही शासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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