पिठोरिया। खोरठा भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग को लेकर पहल तेज हो गई है। खोरठा साहित्य संस्कृति परिषद् के रांची प्रभारी सह राधा गोविन्द विश्वविद्यालय (रामगढ़) के खोरठा विभाग के विभागाध्यक्ष अनाम ओहदार अजनबी ने राज्यसभा सांसद खीरू महतो से उनके पैतृक गांव केदला बस्ती (रामगढ़) स्थित आवास पर शिष्टाचार मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान अनाम ओहदार ने खोरठा भाषा की जनसंख्या, सामाजिक महत्व और शैक्षणिक उपयोगिता से संबंधित विस्तृत तथ्यों को प्रस्तुत किया। राज्यसभा में इस विषय को उठाने का आग्रह किया।
श्री ओहदार ने कहा कि खोरठा झारखंड की सर्वाधिक आबादी द्वारा बोली जाने वाली प्रमुख क्षेत्रीय भाषा है, जो राज्य के लगभग 16 जिलों में व्यापक रूप से प्रचलित है। सदानों और आदिवासी समुदायों के बीच संपर्क भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ज्ञापन में जनगणना के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि वर्ष 2001 में खोरठा भाषियों की संख्या लगभग 49 लाख दर्ज की गई थी, जो वर्ष 2011 में बढ़कर लगभग 85 लाख के आसपास पहुंच गई।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि वर्तमान समय में पुनः भाषा आधारित जनगणना कराई जाए तो खोरठा भाषियों की संख्या लगभग दो करोड़ के आसपास होने का अनुमान है, क्योंकि पिछले वर्षों में भाषाई विस्तार और जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
अनाम ओहदार ने यह भी रेखांकित किया कि खोरठा साहित्य का विपुल संसार उपलब्ध है तथा खोरठा गद्य और पद्य साहित्य का समृद्ध भंडार मौजूद है, जो इसकी सांस्कृतिक गरिमा और ऐतिहासिक परंपरा का प्रमाण है।
साथ ही उन्होंने बताया कि झारखंड की विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं (जेपीएससी, जेएसएससी, सीजीएल एवं अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं) में सर्वाधिक विद्यार्थी खोरठा भाषा को विषय के रूप में चुनते हैं। उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करते हैं।
उन्होंने सांसद से आग्रह किया कि खोरठा भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने हेतु राज्यसभा में प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव या निजी विधेयक के माध्यम से पहल की जाए, ताकि झारखंड के लाखों खोरठा भाषियों की वर्षों पुरानी मांग को न्याय मिल सके।
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