अमृतपाल सिंह मन्नन ने इतिहास से कराया रूबरू
जमशेदपुर। संत शिरोमणि सदगुरु रविदास जी महाराज की 649 वीं जयंती पर रविदास समाज बिरसानगर द्वारा आयोजित धार्मिक समागम को संबोधित करते हुए साकची गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी भाई अमृतपाल सिंह मन्नन ने संत रविदास जी के जीवन पर प्रकाश डाला।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में दर्ज 41 पदों का जिक्र करते हुए कहा कि गुरु नानक देव जी एवं सद्गुरु रविदास जी ने मान सम्मान के साथ जीने का मंत्र शूद्र एवं महिलाओं को दिया।
संत रविदास जी ने बताया कि सभी ईश्वर की संतान है और कोई भी व्यक्ति अहंकार को त्याग कर ही ईश्वर को प्राप्त कर सकता है। जन्म से कोई बड़ा नहीं होता है। पवित्र मन और अच्छे आचरण से ही व्यक्ति की पहचान होती है। मन पवित्र है तो हर जगह तीर्थ है तब गंगा में स्नान की भी जरूरत नहीं है। कर्म ही सच्चा धर्म है।
पिता संतोख दास और मां कलसा देवी की संतान सद्गुरु ने लोगों को अंधविश्वास और आडंबर से दूर रहने का संदेश दिया और निराकार परंपरा की भक्ति से जोड़ा।
इस मौके पर दस नंबर बस्ती गुरुद्वारा साहिब के भाई निर्मल सिंह के जत्थे ने संत रविदास जी के पदों का कीर्तन गायन किया।
सैकड़ों लोगों ने संत रविदास जी के चित्र पर माल्यार्पण किया और बड़े ही श्रद्धा के साथ खिचड़ी भोग का प्रसाद ग्रहण किया।
इसके आयोजन में मुख्य रूप से गौतम रविदास एवं उसके सहयोगी मुकेश रविदास, राजकुमार दास, अश्वनी रविदास, सनी रविदास, अरुण रविदास, शत्रुघ्न रविदास, सुबोध रविदास मनोरंजन रविदास भोला रविदास, अनूप रविदास, संजय रविदास, मंटू रविदास, लखन रविदास का उल्लेखनीय योगदान रहा।
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