परिवार की खर्च में कटौती कर विद्यालय चला रहे हैं शिक्षक

झारखंड शिक्षा
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  • विकास निधि नहीं मिलने से प्रारंभिक विद्यालयों की व्यवस्था चरमराई

रांची। राज्‍य के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकार प्रतिवर्ष विद्यालय विकास निधि के अंतर्गत राशि उपलब्ध कराती है। हालांकि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक यह राशि जारी नहीं की गई है। इसके कारण विद्यालयों में कई आवश्यक कार्य पूरी तरह बाधित हो गए हैं। स्थिति यह है कि अनेक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक अपने पारिवारिक खर्च में कटौती कर विद्यालय की दैनिक जरूरतों की सामग्री स्वयं खरीदने को मजबूर हैं।

सबसे चिंताजनक हालात उन एकल-शिक्षकीय विद्यालयों के हैं, जिनका संचालन पारा शिक्षक कर रहे हैं। सीमित मानदेय में कार्यरत पारा शिक्षकों के लिए निजी जीवन के खर्चों के साथ विद्यालय संचालन का भार उठाना संभव नहीं हो पा रहा है। नतीजन इन विद्यालयों की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है।

विद्यालयों में प्रतिदिन खल्ली की आवश्यकता होती है। इसके अलावा साफ-सफाई के लिए झाड़ू, शौचालय की सफाई सामग्री, हाथ धोने के लिए साबुन, सभी कक्षाओं की छात्र शिक्षक उपस्थिति पंजी, कैश बुक, मध्यान भोजन, दैनिक पंजी, लेजर बुक,  मीटिंग बुक आदि और प्रति वर्ष लगभग 40-45 प्रकार के विभिन्न रिकॉर्ड पंजी की खरीद अनिवार्य होती है। विकास निधि के अभाव में रंग-रोगन भी नहीं हो पा रहा है, जिससे कई विद्यालय भवन गंदे और जर्जर नजर आ रहे हैं।

अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि शिक्षक अपनी ओर से जितना संभव हो पा रहा है, कर रहे हैं। यदि विभाग द्वारा शीघ्र राशि जारी नहीं की गई, तो खल्ली के अभाव में ब्लैकबोर्ड पर पढ़ाई पूरी तरह ठप हो सकती है।

श्री अहमद ने कहा कि वर्तमान में विभाग का रवैया उदासीन प्रतीत हो रहा है। बच्चे बिना स्कूल किट के पढ़ाई कर रहे हैं। सत्र समाप्त होने में अभी दो महीने शेष हैं, लेकिन लिखने के लिए दी गई पतली कॉपियां दो महीने पहले ही समाप्त हो चुकी हैं।

मुख्‍य प्रदेश प्रवक्‍ता ने कहा कि मजबूरन गरीब अभिभावक जैसे-तैसे कॉपी और पेंसिल खरीदकर बच्चों को उपलब्ध करा रहे हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई किसी तरह जारी रह सके। राशि शीघ्र मिलने की प्रत्याशा में शिक्षक अब तक अपनी जेब से कई हजार रुपये खर्च कर चुके हैं।

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